नहर में दरार आने से 400 एकड़ धान की फसल जलमग्न, किसानों को भारी नुकसान.. की मुआवजे की मांग

पंजाब के फिरोजपुर जिले में लछमन नहर में कटाव आने से करीब 400 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई. किसानों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की है. वहीं, जल संसाधन विभाग का कहना है कि सूचना मिलते ही टीम भेजकर कटाव रोकने और नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया.

Kisan India
नोएडा | Published: 3 Jul, 2026 | 08:57 AM

Punjab News: पंजाब के फिरोजपुर जिले के ममदोट क्षेत्र में गुरुवार को लछमन नहर में दरार आने से करीब 400 एकड़ में खड़ी धान की फसल पानी में डूब गई. इस घटना से प्रभावित किसानों में नाराजगी है. उनका आरोप है कि समय पर जल संसाधन विभाग का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ. जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 8 बजे राऊ के हितार गांव के पास नहर में कटाव हो गया. इसके बाद नहर का पानी तेजी से आसपास के खेतों में भरने लगा और बड़े क्षेत्र में खड़ी धान की फसल जलमग्न हो गई.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों का कहना है कि उन्होंने करीब तीन घंटे तक अपने स्तर पर प्रयास कर नहर की दरार को बंद करने की कोशिश की, लेकिन तब तक फसल को काफी नुकसान पहुंच चुका था. प्रभावित किसान वजीर सिंह ने आरोप लगाया कि नहर में जरूरत से ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण यह कटाव हुआ. उन्होंने कहा कि तेज बहाव के चलते पानी तेजी से खेतों में फैल गया और किसान कुछ नहीं कर सके. उनका यह भी कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद विभाग के अधिकारी घंटों तक मौके पर नहीं पहुंचे.

नहर की मरम्मत करने में हो रही दिक्कत

किसानों का कहना है कि धान सीजन के दौरान लछमन नहर में कटाव  की घटनाएं नई नहीं हैं. इससे पहले भी कई बार नहर टूट चुकी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. किसानों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नहर को मजबूत करने के लिए कोई स्थायी कदम नहीं उठाए गए. ग्रामीणों ने बताया कि जब तक नहर में पानी की आपूर्ति बंद नहीं की जाती, तब तक ऐसे कटाव की मरम्मत करना मुश्किल होता है. उन्होंने कहा कि पानी का बहाव रोकने और राहत कार्य शुरू करने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन तुरंत कोई जवाब नहीं मिला.

सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग उठी

प्रभावित किसानों ने सरकार और संबंधित विभाग से नुकसान का सर्वे  कर उचित मुआवजा देने की मांग की है. साथ ही उन्होंने कहा कि नहर में अधिक मात्रा में पानी छोड़ने से पहले उसकी क्षमता का आकलन किया जाए और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए स्थायी मरम्मत एवं मजबूतीकरण का काम कराया जाए.  इस मामले में विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नहर में कटाव की सूचना मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई थी.  जल संसाधन विभाग के एसडीओ राजिंदर सिंह ने कहा कि सूचना मिलने के तुरंत बाद टीम को मौके पर भेजा गया और कटाव को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए गए. उन्होंने कहा कि नहर में हो रहे कटाव को रोकने और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम जारी है, ताकि पानी का बहाव सामान्य किया जा सके और किसानों को आगे किसी तरह की परेशानी न हो.

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