धान के बाद गेहूं घोटाले का शक, 13 आढ़तियों का लाइसेंस सस्पेंड.. जांच के लिए टीम गठित

यूपी से गेहूं की एंट्री रोकने के लिए हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर दो नाके लगाए गए हैं, जहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की 24 घंटे निगरानी रहती है. अधिकारियों का कहना है कि इन नाकों से बिना रजिस्ट्रेशन वाला कोई भी किसान गेहूं लेकर नहीं आ सकता. एडीसी राहुल रैया ने कहा कि जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और मंडियों व बॉर्डर चेकपोस्ट के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 May, 2026 | 08:09 AM

Wheat Procurement: हरियाणा के करनाल जिले में पिछले खरीफ सीजन में हुए कथित धान खरीद घोटाले के बाद अब रबी सीजन में गेहूं की खरीद भी जिला प्रशासन के शक के घेरे में आ गई है. आशंका है कि उत्तर प्रदेश से गेहूं लाकर स्थानीय मंडियों में बेचा जा रहा है. हालांकि, राज्य सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए नियमों को सख्त किया है, ताकि गड़बड़ियों को रोका जा सके और जवाबदेही तय हो सके. इसके तहत किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना जरूरी है, साथ ही आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवाना होता है, चाहे खुद या अपने द्वारा नामित तीन लोगों के जरिए. इसके अलावा, गेहूं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली की फोटो, जिसमें रजिस्ट्रेशन नंबर साफ दिखे, अपलोड करने के बाद ही मंडी में एंट्री के लिए गेट पास मिलता है.

इसके अलावा, मंडियों और गोदामों को जियो-फेंसिंग के जरिए जोड़ा गया है, ताकि उनकी रियल-टाइम निगरानी की जा सके. अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बिना कोई भी किसान मंडी में अपनी फसल नहीं बेच सकता. लेकिन इन सख्त नियमों के खिलाफ किसान विरोध कर रहे हैं और इन्हें वापस लेने की मांग कर रहे हैं. इन सब सुरक्षा उपायों के बावजूद आढ़तियों ने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाया. शक है कि यूपी से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर खरीदा गया गेहूं, MFMB पोर्टल पर बचे हुए किसान रजिस्ट्रेशन का इस्तेमाल करके हरियाणा की सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया.

जांच के लिए एक खास टीम बनाई गई

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने करनाल की मंडियों में प्रतिबंध के बावजूद यूपी से गेहूं आने के मामले की जांच के लिए एक खास टीम बनाई है. इस टीम का नेतृत्व अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर राहुल रैया कर रहे हैं. जांच का मकसद यह पता लगाना है कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसानों का गेहूं सिस्टम में कैसे पहुंचा और क्या इसमें व्यापारियों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत थी, जिन्होंने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन  और गेट पास जैसे नियमों को दरकिनार किया.

13 आढ़तियों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए

अब तक जांच टीम ने 13 आढ़तियों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं- जिनमें 4 करनाल मंडी, 6 इंद्री और 3 बियाना सब-यार्ड के हैं. इसके अलावा, घरौंडा मंडी में पटवारियों की जांच के बाद कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को वापस उत्तर प्रदेश भेज दिया गया. डॉ. शर्मा ने कहा कि टीम अलग-अलग मंडियों में खरीद की जांच कर रही है, 13 लाइसेंस सस्पेंड किए जा चुके हैं और जांच अभी जारी है. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

जिले में अब तक 7.85 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक

यूपी से गेहूं की एंट्री रोकने के लिए हरियाणा-यूपी बॉर्डर  पर दो नाके लगाए गए हैं, जहां ड्यूटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की 24 घंटे निगरानी रहती है. अधिकारियों का कहना है कि इन नाकों से बिना रजिस्ट्रेशन वाला कोई भी किसान गेहूं लेकर नहीं आ सकता. एडीसी राहुल रैया ने बताया कि जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और मंडियों व बॉर्डर चेकपोस्ट के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं. जिले में अब तक 7.85 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज हुई है, जिसमें से 7.57 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है. इसमें फूड, सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स विभाग ने 3.01 लाख एमटी, हाफेड ने 3.47 लाख एमटी, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने 1.03 लाख एमटी और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने 4,543 एमटी गेहूं खरीदा है. जिला प्रशासन के अनुसार, इनमें से 6.6 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों से उठाया भी जा चुका है.

किसान नेता ने कही ये बात

वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि हरियाणा-यूपी बॉर्डर पर सख्त निगरानी की जरूरत है. उन्होंने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि बॉर्डर पर निगरानी बढ़ने से दूसरे राज्य की उपज हरियाणा में नहीं आ पाएगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और घोटाले की संभावना भी कम होगी. उन्होंने यह भी बताया कि धान खरीद के दौरान उत्तर प्रदेश से धान लाकर करनाल की मंडियों में बेचा गया था, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत हुई थी. लेकिन अब लाइसेंस रद्द होने के डर से आढ़ती दूसरे राज्यों से गेहूं लाकर हरियाणा की मंडियों में नहीं बेच पाएंगे.

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Published: 4 May, 2026 | 08:05 AM
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