ट्रायल में कृषि वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, 90 दिनों में तैयार हो जाएगी अरहर की फसल.. पैदावार भी अधिक

हरे मूंग और उड़द की पारंपरिक किस्मों ने भी ट्रायल में बेहतर परिणाम दिखाए हैं. इन फसलों में येलो मोजेक वायरस (YMV) के प्रति मजबूत प्रतिरोध देखा गया है, यहां तक कि आसपास संक्रमित फसलें होने के बावजूद ये स्वस्थ बनी रहीं. अधिकारियों के अनुसार, हरे मूंग और उड़द की तीन-तीन पारंपरिक किस्में अब जारी करने के अंतिम चरण में हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 17 Apr, 2026 | 04:10 PM

Odisha News: दलहन की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है. कृषि वैज्ञानिकों को गर्मी सहन करने वाली और कम समय में तैयार होने वाली दलहन की नई किस्मों पर चल रहे ट्रायल में अच्छे नतीजे मिले हैं. ये किस्में बढ़ते तापमान और बदलते मौसम जैसी कृषि चुनौतियों में बेहतर प्रदर्शन दिखा रही हैं. यानी अधिक गर्मी और लू का असर इन किस्मों के ऊपर नहीं पड़ेगा. खास बात यह है कि ये किस्में 90 दिनों में ही तैयार हो जाती हैं. अगर किसान इन किस्मों की खेती करते हैं, तो उन्हें कम लागत में ज्यादा पैदावार मिलेगी. साथ ही दलहन के उत्पादन में बढ़ोतरी भी होगी.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,  कृषि वैज्ञानिकों ने ये सफलता ओडिशा में पाई है. ओडिशा राज्य बीज निगम (OSSC) और इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) की एक उच्च स्तरीय टीम ने पुरी जिले के पिपिली स्थित सरकारी कृषि फार्म में चल रहे ट्रायल प्लॉट का निरीक्षण किया. टीम ने दो अरहर (पिजन पी) किस्मों- ICPV 25444 और ICPL-22110 के प्रदर्शन की समीक्षा की. इनमें ICPV 25444 किस्म ने 45 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी में भी फूल और फल बनने के चरण  में अच्छा विकास दिखाया है और स्थिर उत्पादन क्षमता का संकेत दिया है.

90 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के बीज प्रणाली (Seed Systems) प्रोजेक्ट के तहत ओडिशा के ट्रायल खेतों में दलहन की नई किस्मों का प्रदर्शन अच्छा रहा है. वहीं, ICPL-22110 नाम की अरहर (पिजन पी) किस्म, जो लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है, अच्छा प्रदर्शन कर रही है. इसे फरवरी के मध्य में बोया गया था और यह फिलहाल फूल आने की अवस्था में है. यह जानकारी ICRISAT के कंसल्टेंट-कम-प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर चक्रधर पांडा ने दी.

मूंग और उड़द की पारंपरिक किस्मों का ट्रायल

चक्रधर पांडा ने कहा कि इसके अलावा हरे मूंग और उड़द की पारंपरिक किस्मों  ने भी ट्रायल में बेहतर परिणाम दिखाए हैं. इन फसलों में येलो मोजेक वायरस (YMV) के प्रति मजबूत प्रतिरोध देखा गया है, यहां तक कि आसपास संक्रमित फसलें होने के बावजूद ये स्वस्थ बनी रहीं. अधिकारियों के अनुसार, हरे मूंग और उड़द की तीन-तीन पारंपरिक किस्में अब जारी करने के अंतिम चरण में हैं. इन्हें लैंडरेस वैरायटल रिलीज कमेटी (LVRC) के जरिए मंजूरी दी जा रही है. यह समिति स्थानीय पारंपरिक फसलों की पहचान, परीक्षण और उन्हें खेती के लिए आधिकारिक रूप से जारी करने का काम करती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ये कम अवधि में तैयार होने वाली और जलवायु सहनशील दलहन किस्में राज्य में दालों के उत्पादन को बढ़ाने में काफी मदद कर सकती हैं.

ओडिशा में कितना है दलहन का रकबा

ओडिशा में दलहन एक प्रमुख फसल है. यहां लगभग 19.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती  की जाती है और हर साल करीब 10.54 लाख टन उत्पादन होता है. राज्य के कटक, पुरी, कालाहांडी, कोरापुट, ढेंकनाल और बोलंगीर जैसे जिले दलहन के प्रमुख उत्पादक हैं. यहां मूंग, उड़द, अरहर, कुलथी और चना जैसी फसलें रबी और खरीफ दोनों मौसमों में उगाई जाती हैं. वहीं, राज्य सरकार को उम्मीद है कि अगर किसान इन किस्मों की खेती करते हैं, तो फसल की पैदावार में बढ़ोतरी होगी. इससे ओडिशा दलहन उत्पादन में धीरे-धीरे आत्मनिर्भार बनेगा.

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Published: 17 Apr, 2026 | 04:06 PM
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