बिहार सरकार ने राज्य में नई चीनी मिलें लगाने वाले निवेशकों के लिए बड़ा ऐलान किया है. सरकार नई चीनी मिल लगाने वाले निवेशकों को 5 साल तक हर साल 14 करोड़ रुपये का सीधा अनुदान देगी. इस तरह एक चीनी मिल को 5 साल में कुल 70 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी. यह प्रावधान बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत किया गया है. यह नीति कुछ दिन पहले ही लागू हुई है. इसे देश में अपनी तरह की पहली पहल बताया जा रहा है.
राज्य के गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा ने कहा है कि 14 करोड़ रुपये का अनुदान हर साल बराबर किस्त में दिया जाएगा. नई चीनी मिल शुरू होने के एक महीने बाद पहली किस्त जारी की जाएगी. इस योजना का लाभ लेने के लिए नई चीनी मिल की न्यूनतम गन्ना पेराई क्षमता 3,500 टन प्रतिदिन होना जरूरी है. सरकार का उद्देश्य राज्य में चीनी उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा देना और गन्ना किसानों के लिए बेहतर बाजार तैयार करना है.
ज्यादा क्षमता वाली चीनी मिल लगाने पर अतिरिक्त 2 करोड़ रुपये की मदद
बिहार सरकार ने नई चीनी मिलों में ज्यादा निवेश को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है. 3,500 टन प्रतिदिन की न्यूनतम क्षमता से ऊपर हर 100 टन अतिरिक्त पेराई क्षमता बढ़ाने पर सरकार 2 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद देगी. यानी ज्यादा क्षमता वाली मिल लगाने पर निवेशकों को ज्यादा आर्थिक लाभ मिलेगा.
चीनी मिल लगाने के लिए 40 एकड़ तक जमीन सिर्फ 1 रुपये में
सरकार ने नई चीनी मिलों के लिए जमीन की व्यवस्था भी की है. 5,000 टन प्रतिदिन क्षमता वाली चीनी मिल लगाने वाले निवेशक को 40 एकड़ तक जमीन लीज पर दी जाएगी. इसके लिए सिर्फ 1 रुपये का नाममात्र शुल्क देना होगा. वहीं, 3,500 टन प्रतिदिन क्षमता वाली मिल के लिए 25 एकड़ तक जमीन इसी शर्त पर उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा, नई चीनी मिल लगाने के लिए खरीदी गई जमीन पर रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी की पूरी राशि वापस की जाएगी. सरकार का उद्देश्य इन सुविधाओं के जरिए राज्य में चीनी उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा देना है.
पुरानी चीनी मिलों को भी मिलेगा फायदा
बिहार सरकार ने सिर्फ नई चीनी मिलों के लिए ही नहीं, बल्कि पहले से चल रही मिलों के विस्तार के लिए भी प्रोत्साहन का प्रावधान किया है. मौजूदा चीनी मिलों की 1,000 टन प्रतिदिन क्षमता बढ़ाने पर 15 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी. इसके अलावा, 1,000 टन की क्षमता बढ़ाने के बाद हर अतिरिक्त 100 टन क्षमता बढ़ाने पर 1.5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद मिलेगी. इससे पुरानी चीनी मिलों को अपनी पेराई क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
गन्ना उद्योग के लिए अलग निवेश नीति
गन्ना आयुक्त अनिल कुमार झा के मुताबिक, बिहार की यह नीति दूसरे राज्यों से अलग है. बिहार ने पहली बार सिर्फ गन्ना उद्योग के लिए अलग निवेश प्रोत्साहन नीति बनाई है. उन्होंने कहा कि देश के दूसरे राज्यों में गन्ने से जुड़े प्रोत्साहन सामान्य औद्योगिक नीतियों का हिस्सा हैं. बिहार ने गन्ना उद्योग के लिए अलग नीति बनाकर इस क्षेत्र को बढ़ावा देने का स्पष्ट संकेत दिया है. झा के मुताबिक, बिहार सरकार की ओर से दिए जा रहे प्रोत्साहन और जमीन से जुड़ी सुविधाएं फिलहाल दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा बेहतर हैं. इससे राज्य में चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करने और नए निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
बिहार में 25 नई चीनी मिलें खोलने का लक्ष्य
बिहार सरकार ने अगले 5 साल में राज्य में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 9 बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की योजना है.सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से अगले पांच साल में राज्य में करीब 1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. सरकार का मकसद बिहार को चीनी उद्योग में निवेश के लिए एक प्रमुख केंद्र बनाना है. देश में चीनी उद्योग पर फिर से ध्यान बढ़ने के बीच बिहार सरकार नई निवेश नीति के जरिए राज्य में इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रही है.