Sugar Production Estimate India: भारत में अगले चीनी सीजन में उत्पादन घटने की आशंका है. अल नीनो के कारण बढ़ती गर्मी और सूखे जैसे हालात गन्ने की फसल पर असर डाल सकते हैं. इसका सीधा असर चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ने की संभावना है. भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता है. ऐसे में उत्पादन में कमी का असर घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है.
2026-27 में कितना रह सकता है चीनी उत्पादन?
ब्लूमबर्ग के सर्वे में शामिल 11 कारोबारियों, बाजार विशेषज्ञों और चीनी मिल संचालकों के अनुमान के मुताबिक अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक भारत में चीनी का सकल उत्पादन करीब 2.9 करोड़ से 3.1 करोड़ टन के बीच रह सकता है. वर्तमान सीजन में उत्पादन करीब 3.1 करोड़ टन रहने का अनुमान है. यानी अगले सीजन में उत्पादन मौजूदा स्तर से कम हो सकता है. अगर मौसम का असर ज्यादा रहा तो उत्पादन अनुमान के निचले स्तर तक भी जा सकता है.
अल नीनो और कमजोर मॉनसून बना बड़ी वजह
भारत में गन्ने की फसल काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर रहती है. इस समय देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से करीब 15 फीसदी कम चल रही है. इसके साथ ही अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की आशंका है. अल नीनो के कारण एशिया के कई हिस्सों में मौसम गर्म और सूखा रहने का खतरा बढ़ जाता है. इससे गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय चीनी संगठन ने भी एशिया में कमजोर उत्पादन के चलते वैश्विक चीनी बाजार में करीब 2.6 लाख टन की कमी का अनुमान जताया है. उत्पादन घटने की आशंका का असर पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिख रहा है. न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी के वायदा भाव इस साल करीब 30 फीसदी बढ़ चुके हैं.
घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए आयात की तैयारी
भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार ने पिछले महीने चीनी मिलों और रिफाइनरियों को शुल्क मुक्त कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी थी. इसके अलावा कारोबारियों और बड़े खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा भी तय की गई है. जानकारों का मानना है कि अगर घरेलू उत्पादन घटता है तो अगले साल भारत को अपनी जरूरत पूरी करने और भंडार बनाए रखने के लिए चीनी का आयात करना पड़ सकता है.
लगातार दूसरे साल आयात की नौबत?
कम उत्पादन के कारण भारत को लगातार दूसरे साल चीनी आयात करने की जरूरत पड़ सकती है. कुछ बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा आयात कोटा पूरा होने के बाद अगले साल जुलाई से ही नए आयात की जरूरत पड़ सकती है. कुछ अनुमानों के मुताबिक 2027-28 सीजन में उत्पादन और घट सकता है. ऐसे में भारत को करीब 20 से 30 लाख टन चीनी आयात करनी पड़ सकती है. हालांकि, यह मात्रा उत्पादन, घरेलू खपत और स्टॉक की स्थिति पर निर्भर करेगी.
एथेनॉल के बजाय चीनी उत्पादन पर जोर
घरेलू बाजार में चीनी के ऊंचे भाव मिलों के लिए ज्यादा चीनी बनाने को फायदे का सौदा बना रहे हैं. ऐसे में मिलें गन्ने से एथेनॉल बनाने के बजाय चीनी उत्पादन को प्राथमिकता दे सकती हैं. सरकार ने भी चीनी मिलों को त्योहारों के दौरान कीमतें काबू में रखने और बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने को कहा है. साथ ही उत्पादन और कीमतों पर हर महीने नजर रखने की तैयारी है. इससे सरकार को आगे की आपूर्ति का बेहतर अनुमान लगाने और समय पर फैसले लेने में मदद मिल सकती है.