पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा, खाद कारखानों को फिर मिलने लगी 97 फीसदी गैस सप्लाई

सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 सीजन में देश को करीब 3.9 करोड़ टन खाद की जरूरत होगी. राहत की बात यह है कि 1 अप्रैल 2026 तक ही करीब 1.8 करोड़ टन खाद पहले से उपलब्ध थी. यानी कुल जरूरत का लगभग 46 प्रतिशत स्टॉक पहले ही तैयार कर लिया गया था.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 May, 2026 | 08:30 AM

Fertiliser gas supply: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देने वाला कदम उठाया है. सरकार ने खाद बनाने वाले कारखानों को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई लगभग पूरी तरह बहाल कर दी है. अधिकारियों के मुताबिक संकट की शुरुआत में खाद कंपनियों को जरूरत की केवल 65 प्रतिशत गैस मिल पा रही थी, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से तेजी से गैस खरीदकर हालात को संभालने की कोशिश की है. इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने वाला है, क्योंकि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले खाद की उपलब्धता मजबूत बनी हुई है. अगर समय पर यह व्यवस्था नहीं की जाती, तो किसानों को यूरिया और दूसरी खादों की कमी का सामना करना पड़ सकता था.

खरीफ सीजन को देखते हुए पहले से तैयारी

देश में खरीफ सीजन की शुरुआत जल्द होने वाली है. इस दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास जैसी फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है. ऐसे समय में किसानों को यूरिया, डीएपी और दूसरी खादों की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है. सरकार ने पहले से तैयारी करते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर से वैश्विक टेंडर जारी कर करीब 25 लाख टन यूरिया की सप्लाई सुनिश्चित की है. इससे आने वाले महीनों में किसानों को खाद की कमी नहीं होगी.

इसके अलावा करीब 13.5 लाख टन डीएपी और 7 लाख टन एनपीके खाद की सप्लाई भी तय कर ली गई है. अधिकारियों के मुताबिक मई और जून के दौरान ये सभी खेप भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच जाएंगी.

दूसरी जरूरी खाद सामग्री की भी खरीद

सरकार सिर्फ यूरिया और डीएपी पर ही नहीं रुकी है. खाद की सप्लाई मजबूत रखने के लिए भारतीय कंपनियों ने दूसरी जरूरी सामग्री की खरीद भी शुरू कर दी है. करीब 4 लाख टन ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP), 3 लाख टन अमोनियम सल्फेट, 5.3 लाख टन अमोनिया और 5.9 लाख टन सल्फर के लिए भी अंतरराष्ट्रीय टेंडर जारी किए गए हैं. सरकार का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर की जा रही ये तैयारियां आने वाले समय में खाद संकट को रोकने में मदद करेंगी.

खरीफ से पहले रिकॉर्ड स्टॉक तैयार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार खरीफ 2026 सीजन में देश को करीब 3.9 करोड़ टन खाद की जरूरत होगी. राहत की बात यह है कि 1 अप्रैल 2026 तक ही करीब 1.8 करोड़ टन खाद पहले से उपलब्ध थी. यानी कुल जरूरत का लगभग 46 प्रतिशत स्टॉक पहले ही तैयार कर लिया गया था.

उत्तर प्रदेश में भी पर्याप्त खाद उपलब्ध

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में भी खाद की उपलब्धता बेहतर बताई जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक खरीफ सीजन के लिए राज्य में यूरिया की जरूरत करीब 7.6 लाख टन है, जबकि उपलब्धता 18.7 लाख टन तक पहुंच चुकी है.

इसी तरह डीएपी की जरूरत करीब 1.5 लाख टन है, लेकिन राज्य में 6.2 लाख टन डीएपी पहले से मौजूद है. फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच उत्तर प्रदेश को करीब 14.9 लाख टन यूरिया सप्लाई किया गया, जबकि जरूरत 11.5 लाख टन की थी.

पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई थी चिंता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पूरी दुनिया में गैस और ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी. भारत की खाद इंडस्ट्री काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर करती है. गैस की कमी होने पर यूरिया उत्पादन सीधे प्रभावित होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गैस सप्लाई बहाल नहीं होती, तो किसानों को महंगी खाद खरीदनी पड़ सकती थी और बाजार में संकट पैदा हो सकता था. हालांकि सरकार की तेज तैयारी और वैश्विक खरीद की वजह से फिलहाल हालात नियंत्रण में दिखाई दे रहे हैं.

किसानों के लिए राहत की खबर

खाद की पर्याप्त उपलब्धता किसानों के लिए राहत भरी खबर है. समय पर यूरिया और दूसरी खाद मिलने से खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं. सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में भी खाद की सप्लाई और स्टॉक पर लगातार नजर रखी जाएगी, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

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Published: 20 May, 2026 | 08:30 AM

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