अब मक्का की मूंछों से होगी कमाई, किसान बेकार समझे जाने वाले रेशों से बढ़ाएंगे आमदनी

मक्के के रेशों को अब बेकार नहीं बल्कि कमाई का नया साधन माना जा रहा है. कृषि विभाग के अनुसार इन रेशों से औषधीय चाय और अन्य उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है. इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय का नया अवसर मिल सकता है और मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 25 May, 2026 | 06:30 PM

Corn Silk: मक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. जिस मक्के के रेशम यानी मक्के के बालों को अब तक बेकार समझकर फेंक दिया जाता था, वही अब कमाई का नया जरिया बन सकते हैं. कृषि विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार मक्के के रेशों का उपयोग औषधीय चाय, हर्बल पाउडर और सौंदर्य उत्पाद बनाने में किया जा रहा है. बाजार में मक्के के रेशों से बनी विशेष चाय की कीमत 50 ग्राम के लिए करीब 500 रुपये तक पहुंच रही है. इससे किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल सकता है.

पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर हैं मक्के के रेशे

कृषि विभाग के मुताबिक मक्के के रेशों  में विटामिन सी, विटामिन के, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इन्हें स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. इन रेशों से तैयार की जाने वाली चाय शरीर को कई तरह के फायदे पहुंचा सकती है. शुरुआती शोधों में यह सामने आया है कि इसका उपयोग किडनी की पथरी, मूत्र संक्रमण, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है. इसी वजह से बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का शानदार मौका

विभाग का कहना है कि किसान मक्के  के रेशों को इकट्ठा कर सुखाकर उनकी पैकिंग और प्रसंस्करण करके अच्छी आय कमा सकते हैं. अभी तक किसान फसल कटाई के दौरान इन रेशों को बेकार समझकर फेंक देते थे, लेकिन अब यही उत्पाद मूल्यवर्धन के जरिए मुनाफे का साधन बन सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यदि ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे प्रसंस्करण केंद्र बनाए जाएं, तो इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और किसानों की आय में भी सुधार होगा.

स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद

मक्के के रेशों को प्राकृतिक मूत्रवर्धक माना जाता है, जो शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं. यह गुर्दे की पथरी और मूत्राशय संक्रमण में राहत देने में सहायक माने जाते हैं. इसके अलावा इसमें मौजूद पोषक तत्व खराब  कोलेस्ट्रॉल को कम करने और रक्तचाप नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं. पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग बच्चों और वयस्कों में रात में बिस्तर गीला करने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए भी किया जाता रहा है.

खेती में मूल्यवर्धन से बढ़ेगी किसानों की आय

विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में मूल्यवर्धन  ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका बन रहा है. मक्के के रेशों जैसे उत्पादों का सही उपयोग किसानों को नए बाजारों से जोड़ सकता है. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल के हर हिस्से का उपयोग करें और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ें.

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Published: 25 May, 2026 | 06:30 PM

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