मक्का के पौधे में भुट्टे चार पर दाना एक भी नहीं, जांच कमेटी बनी.. बीज कंपनी को नोटिस जारी 

Maize farmer protest: किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि मक्के की फसल देखने में तो हरी-भरी और अच्छी लग रही है, लेकिन भुट्टों में मक्के के दाने नहीं बने हैं. किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए कृषि निदेशालय ने जांच समिति बनाई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 21 Jun, 2026 | 05:04 PM

उत्तर प्रदेश में मथुरा के किसानों ने शिकायत की है कि उनकी फसल में भुट्टे खाली निकल रहे हैं. मक्के के पड़े तो खूब उगे हैं और एक पेड़ में चार-चार भुट्टे हैं, लेकिन एक भी भुट्टे में दाना नहीं बना है. किसानों ने भारी नुकसान की शिकायत के बाद हंगामा किया, जिसके बाद प्रशासन जागा और मामले की जांच के लिए संयुक्त कृषि निदेशक की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई है. किसानों ने कहा कि उनकी मेहनत, पैसा और समय बर्बाद हुआ है, सरकार उन्हें मुआवजा दे. वहीं, किसान नेता धर्मेंद्र मलिक ने घटिया बीज को लेकर किसानों के साथ धोखा बताया है और कृषि विभाग को कटघरे में खड़ा किया है.

मक्के के खेतों में भुट्टे खाली निकलने पर किसानों में गुस्सा

मथुरा के बलदेव और राया क्षेत्र में सरकारी बीज केंद्र से सब्सिडी पर मक्का बीज लेकर बुवाई करने वाले किसानों की फसल पैदावार नहीं हुई है. किसानों का कहना है कि खेत में पौधे खूब हैं लेकिन भुट्टे में दाने नहीं हैं. मक्के की फसल देखने में तो हरी-भरी और अच्छी लग रही है, लेकिन भुट्टों में मक्के के दाने नहीं बने हैं. किसान सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं.

54 किसानों ने सरकारी केंद्र से 16 क्विंटल बीज लिया था

जिला कृषि अधिकारी अवेश कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि किसानों से शिकायतें मिली हैं राया में सरकारी कृषि बीज डिपो से सब्सिडी वाले मक्के के बीज खरीदे थे. जिले के 54 किसानों ने ‘हिल इंडिया’ कंपनी के 16 क्विंटल बीजों का इस्तेमाल किया था. किसानों ने कहा है कि पौधों में भुट्टे चार-चार तक लगे हैं लेकिन एक भी भुट्टे में दाना नहीं बना है.

क्यों खराब निकली मक्का फसल

जिला कृषि अधिकारी ने यह भी कहा कि हाइब्रिड बीज की यह किस्म तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होती है. इसकी बुवाई के लिए फरवरी का महीना सबसे अच्छा होता है. 10 मार्च तक बोई गई फसलें अच्छी हालत में हैं. हालांकि, जिन किसानों ने 10 मार्च के बाद आलू या गेहूं की कटाई के बाद 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में फसल बोई, उनकी फसल के फूल (पिस्टिल) सूख गए. नतीजतन भुट्टों में दाने नहीं बन पाए और फसल बर्बाद हो गई.

कृषि निदेशालय के निर्देश पर जांच कमेटी बनी

किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए कृषि निदेशालय ने आगरा डिवीजन के संयुक्त कृषि निदेशक विनोद कुमार यादव की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनाई है. अधिकारियों ने पीटीआई को रविवार को बताया कि समिति में जिला कृषि अधिकारी अवेश कुमार सिंह, योगेश कुमार शर्मा (कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी) और बीज बनाने वाली कंपनी ‘हिल इंडिया’ का एक प्रतिनिधि शामिल है.

जेनेटिक क्वालिटी, खेतों की मिट्टी, नमी स्तर समेत कई बिंदु जांचेगी

पैनल कई अहम बातों की जांच करेगा, जैसे मक्के के बीजों की जेनेटिक क्वालिटी, प्रभावित खेतों की मिट्टी की सेहत और नमी का स्तर क्या है. विशेषज्ञ यह भी पता लगाएंगे कि फसल खराब होने के लिए बीज की क्वालिटी, खराब मौसम या मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी जिम्मेदार है या नहीं. अवेश कुमार सिंह ने कहा कि अगर जांच रिपोर्ट में बीजों में कोई खराबी या धोखाधड़ी पाई जाती है तो कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसानों को मुआवजा दिया जाएगा. बीज बनाने वाली कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.

Maize farmer protest in mathura

भाकियू के प्रांतीय अध्यक्ष राज कुमार सिंह मथुरा के राया क्षेत्र के युवा किसान सूरज के खेत पहुंचे और हकीकत देखी.

जिले के दूसरे हिस्से में फसल ठीक हुई

मथुरा के दूसरे इलाकों में भी इसी कंपनी के बीजों का इस्तेमाल किया गया था, जहां फसलों में भरपूर दाने आए. फिर भी बलदेव डेवलपमेंट ब्लॉक के किसानों की फसलों में दाने नहीं बने. उन्होंने बताया कि मौके पर जाकर जांच करने से शिकायतों की सच्चाई की पुष्टि हुई. सिंह ने यह भी कहा कि प्रभावित और अप्रभावित दोनों तरह की फसलों के औसत प्रदर्शन का हिसाब लगाने वाली एक रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाएगी.

किसान सूरज के खेत में भुट्टे खोखले, मुआवजा मांगा

भाकियू के प्रांतीय अध्यक्ष राज कुमार सिंह मथुरा के राया क्षेत्र के युवा किसान सूरज के खेत पहुंचे और हकीकत देखी. उन्होंने कई पेड़ों से भुट्टे खोलकर दिखाए जो खोखले थे. युवा किसान सूरज ने बताया कि उन्होंने सरकारी बीज केंद्र राया से सब्सिडी पर बीज खरीदकर बुवाई की थी. उन्होंने  सरकार से नुकसान की भरपाई करने के लिए मुआवजे की मांग की है. वहीं, भाकियू के प्रांतीय अध्यक्ष राज कुमार सिंह ने सरकार और विभाग को लापरवाही के लिए जिम्मेदार बताते हुए बीज बनाने वाली कंपनी हिल इंडिया पर कार्रवाई करने की मांग की है.

किसान नेता ने कृषि विभाग को कटघरे में घसीटा

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा किसरकार जब कोई नई योजना, नई प्रजाति, नई बीज किसानों को देती है तो कहा जाता है कि किसानों का हित होगा लेकिन अधिकांश मामलों में देखा जाता है कि किसान को छोड़कर सभी का हित हो रहा है. बीज बनाने वाला, खाद, दवा बेचने वाले, कृषि विभाग सभी लाभ में है, आखिर किसान ही घाटे में है. क्या विभाग किसानों को न्याय देगा या किसान की आवाज को जांच की फाइलों में दबा दिया जाएगा.

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Published: 21 Jun, 2026 | 04:36 PM

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