Punjab News: एक महीने बाद से पंजाब के किसान खरीफ सीजन की तैयारी में लग जाएंगे. ऐसे में किसान खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही यूरिया की व्यवस्था कर रहे हैं. लेकिन इस बार यूरिया की व्यवस्था करने में किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इससे फसल की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है. वहीं, मक्का किसानों का कहना है कि एक बोरी यूरिया के लिए उन्हें जद्दोजहद करनी पड़ रही है. हालांकि, मिड-मार्च तक पंजाब में करीब 4.8 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 31,000 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हुई थी.
कपूरथला के सैदवां गांव के किसान हरजिंदर सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि उन्हें मक्के की फसल के लिए यूरिया नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि पहले कभी नहीं सोचा था कि एक बोरी यूरिया के लिए इतनी परेशानी होगी, जबकि धान की बुवाई अभी एक महीने से ज्यादा दूर है. आमतौर पर गेहूं की कटाई के बाद का समय खुशी का होता है, लेकिन इस बार पहले खराब गेहूं की क्वालिटी ने परेशान किया और अब कटाई के बाद यूरिया की कमी ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
दुकानदार यूरिया की कालाबाजारी कर रहे हैं
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर उर्वरक और कच्चे माल की सप्लाई पर भी पड़ा है. इससे सरकार के लिए उर्वरकों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, हालांकि किसानों को अभी भी वही पुरानी रिटेल कीमत पर यूरिया मिल रहा है. किसानों का कहना है कि कई जगह दुकानदार अब यूरिया की कालाबाजारी कर रहे हैं. या इसे कीटनाशकों के साथ पैकेज में दे रहे हैं.
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31,000 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हुई
मिड-मार्च तक पंजाब में करीब 4.8 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 31,000 मीट्रिक टन डीएपी की आपूर्ति हुई थी. इसमें से सरकार ने 2 लाख मीट्रिक टन यूरिया प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को दिया, जबकि IFFCO ने 1.5 लाख मीट्रिक टन यूरिया इन समितियों को उपलब्ध कराया. डीएपी की उपलब्धता इन समितियों के पास लगभग 12,000 से 15,000 मीट्रिक टन के बीच है.
समाना के पास कुलरान कलां सहकारी समिति के दर्शन सिंह कुलरान का कहना है कि हर सोसायटी को बहुत कम मात्रा में उर्वरक मिल रहा है, और जो स्टॉक मिला है वह भी तेजी से खत्म हो रहा है. कुल मिलाकर आने वाले खरीफ सीजन (धान की फसल) के लिए पंजाब में करीब 16 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 2 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है.
किसानों ने पहले से ही उर्वरक का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया
कई किसानों ने पहले से ही उर्वरक का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है. मार्च में यूरिया की बिक्री में अचानक बढ़ोतरी देखकर राज्य कृषि विभाग भी हैरान रह गया. इसके बाद विभाग ने सभी मुख्य कृषि अधिकारियों को पत्र लिखकर उर्वरक का समझदारी से उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि अगर वैश्विक राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आगे चलकर यूरिया की कमी हो सकती है. हालांकि उनका यह भी मानना है कि कई किसान जरूरत से ज्यादा उर्वरक का इस्तेमाल कर रहे हैं, और अब उन्हें विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इसका संतुलित उपयोग करना चाहिए.