गेहूं कटाई के बाद नया भूसा ऐसे खिलाएं, पशु रहेंगे टनाटन और पेट की बीमारी से मिलेगा बचाव

Fodder Management: गेहूं कटाई के बाद नया भूसा पशुओं को तुरंत खिलाना नुकसानदेह हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसे हरे चारे, पानी और मिनरल मिक्सचर के साथ संतुलित मात्रा में देना चाहिए. सही तरीके से नया भूसा खिलाने पर पाचन बेहतर रहता है, पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 Apr, 2026 | 12:11 PM

Animal Feed: गेहूं की कटाई के बाद इन दिनों घर-घर नया भूसा पहुंच चुका है और ज्यादातर पशुपालक इसे तुरंत चारे में इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन यही जल्दबाजी कई बार पशुओं की सेहत पर भारी पड़ सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, नया भूसा अगर सही तरीके से नहीं खिलाया जाए तो पशुओं में पेट फूलना, गोबर बंद होना, अपच और दूध उत्पादन कम होने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. अच्छी बात ये है कि कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इसी नए भूसे को सुरक्षित और फायदेमंद चारे में बदला जा सकता है. अगर पशुपालक हरे चारे, पानी और मिनरल मिक्सचर के साथ संतुलन बनाकर इसे दें, तो पशु टनाटन रहेंगे और उनकी सेहत भी बेहतर बनी रहेगी.

नया भूसा क्यों बन सकता है परेशानी की वजह

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार गेहूं से निकला नया भूसा  काफी सख्त होता है और इसमें फाइबर व लिग्निन की मात्रा ज्यादा रहती है. यही कारण है कि पशु इसे जल्दी पचा नहीं पाते. अगर इसे ज्यादा मात्रा में अकेले ही दे दिया जाए, तो पशुओं में कब्ज, गोबर कम होना, पेट भारी रहना और गैस बनने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. कई बार पशुपालक सोचते हैं कि नया भूसा ताजा है, इसलिए ज्यादा फायदेमंद होगा, लेकिन बिना संतुलन के यही चारा नुकसान भी कर सकता है.

मजबूरी में देना हो तो ऐसे करें सही इस्तेमाल

अगर पुराने चारे की कमी है और नया भूसा ही देना पड़ रहा है, तो इसे सीधे न खिलाएं. विशेषज्ञ के अनुसार इसे हरे चारे के साथ बराबर मात्रा  में मिलाकर देना सबसे सही तरीका है. हरा चारा पाचन को आसान बनाता है और नया भूसा पेट में रुकता नहीं. इससे पशुओं का पेट संतुलित रहता है और वे आराम से जुगाली कर पाते हैं. यह छोटा सा बदलाव पशुओं को बीमार होने से बचाने में बहुत मदद करता है.

पानी में भिगोकर और मिनरल मिलाकर दें

नया भूसा खिलाने का सबसे आसान और असरदार तरीका है कि इसे पहले पानी में अच्छी तरह भिगो दें. इससे भूसा नरम हो जाता है और पशु आसानी से चबा व पचा लेते हैं. पशु चिकित्सक के अनुसार इसमें मिनरल मिक्सचर या थोड़ा सा गुड़-पानी मिलाने से इसका पोषण और बढ़ जाता है. इससे पाचन तंत्र बेहतर काम करता है और पेट से जुड़ी दिक्कतें कम होती हैं. भिगोया हुआ भूसा खासकर दूध देने वाले पशुओं के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

सही तरीका अपनाया तो दूध और सेहत दोनों बेहतर

विशेषज्ञ के अनुसार नया भूसा पूरी तरह नुकसानदेह नहीं है, बस इसे सही तरीके से देना जरूरी है. अगर पशुपालक हरा चारा, सूखा चारा, मिनरल और पानी का संतुलन  बनाकर खिलाएं, तो पशु स्वस्थ रहते हैं. इससे दूध उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है, क्योंकि पाचन सही रहने पर पशु ज्यादा पोषण लेते हैं. ऐसे में नया भूसा जल्दबाजी में अकेले न दें. थोड़ी समझदारी से यही चारा पशुओं की सेहत सुधारने, दूध बढ़ाने और खर्च घटाने का आसान तरीका बन सकता है. यही वजह है कि पशुपालन में चारे का सही संतुलन सबसे जरूरी माना जाता है.

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