यूपी की गौशालाएं बनाएंगी बिजली और खाद, पशुपालन मंत्री का आया बड़ा बयान

Cow Shelter Management: उत्तर प्रदेश सरकार ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर गैस, भूसा बैंक, हरे चारे और पंचगव्य उत्पादों पर बड़ा फोकस किया है. इससे गोवंशों को बेहतर देखभाल मिलेगी, किसानों को जैविक खाद और स्वच्छ ईंधन का लाभ होगा, जबकि गांवों में महिला समूहों के जरिए रोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर बनेंगे.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 9 Apr, 2026 | 01:51 PM

UP Gaushala News: उत्तर प्रदेश की गौशालाएं अब खुद बिजली पैदा करेंगी और जैविक खाद बनाएंगी. इसको लेकर पशुपालन विभाग की ओर से गौशालाओं को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं. कहा गया है कि गौशालाओं को सिर्फ गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि अब इन्हें ऊर्जा, रोजगार और किसानों की कमाई बढ़ाने के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. राज्य के पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के मंत्री धर्मपाल सिंह ने निर्देश दिए हैं कि गौशालाओं में गोबर का बेहतर इस्तेमाल कर गोबर गैस (बायोगैस), वर्मीकम्पोस्ट और पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए. बता दें कि बायोगैस प्लांट से बिजली पैदा की जाती है.

उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि गोबर गैस सस्ता और स्वच्छ ईंधन है, जो पर्यावरण बचाने के साथ किसानों की लागत भी कम करेगा. साथ ही गर्मी को देखते हुए सभी गौशालाओं में त्रिपाल, हरा चारा, भूसा, साफ पानी और मुफ्त बोरिंग जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए. सरकार का मकसद है कि गोआश्रय स्थल आत्मनिर्भर बनें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके तैयार हों.

गौशालाओं में गोबर गैस और पंचगव्य से आत्मनिर्भरता

कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि गौशालाओं में रोज निकलने वाले गोबर का सही उपयोग  बहुत जरूरी है. अब इसे सिर्फ साफ करने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि गोबर गैस प्लांट लगाकर स्वच्छ ईंधन तैयार किया जाएगा. इससे गौशालाओं की रसोई, पानी गर्म करने और अन्य जरूरतों में सस्ती ऊर्जा मिलेगी. इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र से अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोकाष्ठ, दीये, कंडे, गमले और गोअर्क जैसे उपयोगी उत्पाद बनाने पर जोर दिया गया है. मंत्री ने कहा कि इससे गौशालाएं अपनी आय खुद बढ़ा सकेंगी. इस काम से महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ने पर भी खास फोकस है, ताकि गांवों में रोजगार बढ़े और महिलाओं की आमदनी में इजाफा हो.

गर्मी में गौशालाओं के लिए खास इंतजाम

तेज गर्मी को देखते हुए मंत्री ने सभी गौशालाओं में तुरंत जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा. इसमें त्रिपाल लगाना, हरे चारे की व्यवस्था, पर्याप्त भूसा, साफ पानी और मुफ्त  बोरिंग सबसे अहम हैं. सरकार चाहती है कि किसी भी गौशाला में पानी की कमी न हो, इसलिए निशुल्क बोरिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा बीमार और कमजोर गोवंशों के लिए 2500 से ज्यादा गौशालाओं में आइसोलेशन कक्ष बनाए गए हैं. मंत्री ने साफ कहा कि गर्मी के मौसम में गोवंशों को राहत देने में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी. जिन जगहों पर चारा कम मिला, वहां अधिकारियों को चेतावनी भी दी गई है.

भूसा बैंक और हरे चारे के लिए बड़ा अभियान

प्रदेश की हर गौशाला में कम से कम 10 क्विंटल भूसे का आरक्षित भंडार रखना अनिवार्य किया गया है. 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान चलाया जाएगा, जिसमें दान और खरीद दोनों से भूसा इकट्ठा होगा. गेहूं कटाई के समय स्थानीय किसानों  से 400 से 650 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर भूसा खरीदने की योजना बनाई गई है. इसके लिए खाली पड़े पशु सेवा केंद्र, बंद आश्रय स्थल और अस्थायी गोदामों का उपयोग भंडारण के लिए होगा. इसके साथ ही 15 मई तक गोचर भूमि पर हाइब्रिड नेपियर घास की बुवाई कर सालभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. इससे गौशालाओं में चारे की समस्या काफी हद तक कम होगी.

UP Gaushala News, Biogas Project, Cow Shelter Management, Fodder Bank

7416 गोआश्रय स्थलों में 12,37,694 गोवंश.

7416 गौशालाओं में 12 लाख से ज्यादा गोवंश की देखभाल

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में इस समय 7416 गोआश्रय स्थलों में 12,37,694 गोवंश संरक्षित हैं. वहीं मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1,14,481 लाभार्थियों को 1,84,227 गोवंश सौंपे गए हैं. निरीक्षण के दौरान जहां भी कमियां मिलीं, वहां तुरंत सुधार के निर्देश दिए गए. कुछ जिलों में समय पर फंड रिक्वेस्ट न भेजने और भूसा आपूर्ति में लापरवाही पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने साफ कहा कि गोवंश संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के काम में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही पर कठोर कार्रवाई  होगी. उत्तर प्रदेश सरकार अब गौशालाओं को गोबर गैस, जैविक खाद, पंचगव्य उत्पाद और चारा प्रबंधन के जरिए आत्मनिर्भर मॉडल बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. इससे गोवंश संरक्षण मजबूत होगा, किसानों को जैविक खाद और ऊर्जा मिलेगी, जबकि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे.

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