हरियाणा के यमुनानगर जिले का छछरौली इलाका जल्द ही बेरीज की खेती के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है. यहां करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर बेरीज’ बनाया जाएगा. इस सेंटर का मकसद किसानों को ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी और दूसरी बेरीज की वैज्ञानिक तरीके से खेती के लिए तैयार करना है. यहां किसानों को अच्छी क्वालिटी की पौध, खेती की तकनीकी जानकारी और आधुनिक उत्पादन तकनीक उपलब्ध कराई जाएगी. इससे क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
यमुनानगर के जिला बागवानी अधिकारी डॉ. दिलबाग सिंह लिटानी ने द ट्रिब्यून से कहा कि इस सेंटर के लिए छछरौली कस्बे स्थित सरकारी बाग और नर्सरी में जमीन चिन्हित की गई है. इस प्रोजेक्ट का फायदा सिर्फ यमुनानगर के किसानों को ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के किसानों को भी मिलेगा. सेंटर को क्षेत्र में बेरीज की खेती को बढ़ावा देने वाले रीजनल सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा. डॉ. दिलबाग सिंह लिटानी ने कहा कि प्रस्तावित सेंटर में हाईटेक नर्सरी, मदर प्लांट ब्लॉक, डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट, ट्रेनिंग सेंटर और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था होगी. किसानों को रोगमुक्त और प्रमाणित पौध सामग्री दी जाएगी. साथ ही, उन्हें पौध तैयार करने से लेकर फसल की कटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की ट्रेनिंग दी जाएगी.
स्थानीय स्तर पर मिलेंगे बेहतर पौधे
अधिकारियों का मानना है कि इस सेंटर के शुरू होने से किसानों की दूसरे राज्यों से महंगे पौधे खरीदने की निर्भरता कम होगी. यहां स्थानीय स्तर पर अच्छी क्वालिटी के पौधे तैयार किए जाएंगे, जिससे पौधों के बेहतर तरीके से पनपने की उम्मीद है. इससे खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस सेंटर के जरिए किसानों को वैज्ञानिक खेती और आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी. इससे बेरीज की गुणवत्ता बेहतर करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
घटेगी लागत और बढ़ेगी पैदावार
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रमाणित पौध और नियमित तकनीकी मदद मिलने से ज्यादा किसान पारंपरिक फसलों के बजाय बेरीज जैसी महंगी और ज्यादा मुनाफे वाली बागवानी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं. यह सेंटर बेरीज की खेती करने वाले किसानों के लिए वन-स्टॉप सेंटर की तरह काम करेगा. यहां किसानों को रोगमुक्त पौधे, खेती की वैज्ञानिक जानकारी, आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन, कटाई से लेकर पैकेजिंग और मार्केटिंग तक की ट्रेनिंग, बेहतर सिंचाई और नर्सरी प्रबंधन की जानकारी मिलेगी. इससे उत्पादन लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी
यमुनानगर बनेगा बेरीज की खेती का बड़ा केंद्र, स्ट्रॉबेरी का रकबा 150 एकड़
अधिकारियों के मुताबिक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनने के बाद यमुनानगर हरियाणा में बेरीज की खेती के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है. इससे बागवानी और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. जिला बागवानी अधिकारी डॉ. दिलबाग सिंह लिटानी ने कहा कि यमुनानगर में अभी करीब 150 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है. इसमें सबसे ज्यादा रकबा छछरौली और प्रतापनगर इलाकों में है. यहां की जलवायु और मिट्टी बेरीज की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है.
कई पारंपरिक फसलों के मुकाबले ज्यादा मुनाफा मिलने के कारण किसान अब तेजी से व्यावसायिक स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. नए सेंटर से किसानों को आधुनिक तकनीक और अच्छी क्वालिटी की पौध आसानी से मिल सकेगी, जिससे इस रुझान को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
ब्लूबेरी से रास्पबेरी तक की खेती को मिलेगा बढ़ावा
सेंटर में स्थानीय मौसम के अनुकूल ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी, रास्पबेरी और दूसरी बेरीज की बेहतर किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा. स्ट्रॉबेरी की प्रमुख किस्मों में स्वीट चार्ली, विंटर डॉन, कैमारोसा, फेस्टिवल, फ्लोरिडा ब्यूटी और विंटर स्टार शामिल हैं. बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रॉबेरी में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और डाइटरी फाइबर पाए जाते हैं.