हरियाणा के आलू किसानों का मुआवजा अटका, बुवाई से पहले भुगतान की उठी मांग

हरियाणा के आलू किसान पिछली फसल का भावांतर भरपाई योजना का बकाया मुआवजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं. किसान संगठन के मुताबिक, करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है. पिछले महीने 50 करोड़ रुपये मंजूर होने के बावजूद रकम किसानों के खातों में नहीं पहुंची. संगठन ने बुवाई से पहले भुगतान की मांग की है और आंदोलन की चेतावनी दी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Sep, 2026 | 08:51 AM

हरियाणा के आलू किसान पिछली फसल का भावांतर भरपाई योजना (BBY) का बकाया मुआवजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) ने राज्य सरकार से मांग की है कि अगली बुवाई शुरू होने से पहले किसानों का बकाया भुगतान जारी किया जाए. इस योजना के तहत जब किसी फसल का बाजार भाव सरकार की तय सुरक्षित कीमत से कम हो जाता है, तो किसानों को दोनों कीमतों के अंतर की भरपाई की जाती है. पिछली फसल के दौरान आलू की सुरक्षित कीमत 600 रुपये प्रति क्विंटल तय थी. लेकिन मंडियों में आलू की आवक बढ़ने और मांग कमजोर रहने से बड़ी मात्रा में फसल 600 रुपये से कम भाव पर बिकी. इससे किसानों को योजना के तहत मुआवजे की जरूरत पड़ी.

भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने द ट्रिब्यून से कहा कि आलू की बुवाई जल्द शुरू होने वाली है, लेकिन कई किसानों को पिछली फसल का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि पिछले सीजन में आलू के कम भाव के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ था. कई किसान अपनी उत्पादन लागत भी नहीं निकाल पाए.

50 करोड़ रुपये मंजूर होने के बाद भी खातों में नहीं पहुंची रकम

चढूनी के मुताबिक, राज्य सरकार भावांतर भरपाई योजना के तहत दो किस्तें जारी कर चुकी है, लेकिन महीनों बाद भी बड़ी संख्या में किसानों का भुगतान बाकी है. उन्होंने दावा किया कि राज्य में आलू किसानों का करीब 90 करोड़ रुपये का मुआवजा बकाया है. किसान संगठन को बताया गया था कि पिछले महीने करीब 50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, लेकिन यह रकम अभी तक किसानों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है.

बढ़ती खेती लागत से किसान परेशान, मुआवजा जल्द जारी करने की मांग

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के नेता ने कहा कि डीजल, खाद, कीटनाशक और दूसरी कृषि सामग्री महंगी होने से किसान पहले ही आर्थिक दबाव में हैं. ऐसे में मुआवजा जारी करने में देरी किसानों के साथ अन्याय है. बीकेयू (चढूनी) के प्रवक्ता राकेश बैन्स ने बताया कि आलू की बुवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह से शुरू होगी. किसानों को बीज खरीदने और खेती का दूसरा खर्च पूरा करने के लिए पैसों की जरूरत है. उन्होंने सरकार से बकाया मुआवजा जारी करने की स्पष्ट समयसीमा घोषित करने की मांग की. बैन्स ने कहा कि जिन किसानों के लिए मुआवजा मंजूर  हो चुका है, उन्हें तुरंत भुगतान किया जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द भुगतान नहीं हुआ तो किसान संगठन आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा. इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

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Published: 7 Sep, 2026 | 08:48 AM

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