किसानों को कंगाल न कर दे ये कई महीनों का सूखा.. 5 लाख हेक्टेयर में फसलों पर बुरा असर, कृषि विभाग अलर्ट

आमतौर पर हर बार अक्टूबर-नवंबर में बारिश होती है. लेकिन, इस बार बारिश नहीं होने से खेतों में फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. खेत खलियानों में पर्याप्त नमी न होने से बुवाई प्रभावित हुई है. इससे गेहूं, सब्जियों की फसलों और सेब समेत अन्य फलों की क्वालिटी, उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. 

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 1 Jan, 2026 | 12:01 PM

कम बारिश के चलते उपजे सूखे जैसे हालातों ने किसानों को परेशान कर दिया है. हिमाचल प्रदेश में नवंबर से बारिश नहीं होने से रबी सीजन की गेहूं, सब्जियों और सेब समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है. मिट्टी में नमी नहीं होने से खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ने लगी है. किसानों का कहना है कि अगर अगले सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो फसलों को बचाना मुश्किल होगा. हालात को देखते हुए कृषि विभाग और उद्यान विभाग अलर्ट मोड पर है.

सामान्य से 83 फीसदी कम बारिश से कई लाख हेक्टेयर फसल सूखने की कगार पर

हिमाचल प्रदेश में करीब 7 लाख हेक्टेयर में फसलें और बागवानी की जाती है. लेकिन, ऊना, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, कुल्लू समेत कई अन्य जिलों में कम बारिश से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं. हिमाचल के ज्यादातर जिलों में खेती बारिश पर निर्भर है. राज्य मौसम विभाग के अनुसार सामान्य से 83 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. इससे इन इलाकों में रबी फसलों जैसे गेहूं की बुवाई, अंकुरण और पौधे की ग्रोथ में नमी की कमी के कारण बुरा असर पड़ रहा है.

कुल्लू घाटी में तीन महीने से सूखे जैसे हालात

कुल्लू घाटी में तीन महीने से सूखे के हालात बने हुये हैं. आमतौर पर हर अक्टूबर-नवंबर में बारिश होती है. लेकिन, इस बार बारिश नहीं होने से खेतों में फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं. खेत खलियानों में पर्याप्त नमी न होने से बुवाई प्रभावित हुई है और बाग-बगीचों में खाद तौलिए बनाने का काम पर भी बुरा असर पड़ा है. इससे सेब समेत अन्य फलों की क्वालिटी, उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.

बारिश नहीं हुई तो गेहूं उत्पादन घट जाएगा

सबसे कम बारिश वाले जिले ऊना में कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने कहा कि बारिश न होने से किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है. सर्द और शुष्क मौसम का असर अब रबी फसलों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. खासकर गेहूं की फसल गैर-सिंचित क्षेत्रों में सूखे की चपेट में है, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है. खेतों में खड़ी फसल का पीला पड़ना इस बात का संकेत है कि पौधों को आवश्यक नमी नहीं मिल पा रही है. सीमित सिंचाई सुविधाओं के कारण अधिकांश किसान पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं. यदि समय पर वर्षा नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं.

ऊना जिले की 40 फीसदी फसल पर सूखे का बुरा असर

ऊना जिले में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जिले में लगभग 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती की जाती है. इसमें केवल करीब 45 फीसदी क्षेत्र ही सिंचित है. शेष 40 फीसदी से अधिक क्षेत्र पूरी तरह वर्षा आधारित है, जहां इस समय सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. कृषि विभाग के अनुसार गैर-सिंचित क्षेत्रों में लगभग 40 फीसदी फसल प्रभावित मानी जा रही है. उपमंडल अंब और बंगाणा के कई क्षेत्र सूखे से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं.

फसल बचाने के लिए कृषि विभाग अलर्ट मोड पर

किसानों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को बचाना मुश्किल होगा और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. कृषि विभाग की एसएमएस टीमें अलर्ट मोड पर हैं और फसलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. सिंचित क्षेत्र में पूरे फसल चक्र में कम से कम पांच सिंचाई आवश्यक होती हैं और किसानों को इसी संबंध में लगातार परामर्श दिया जा रहा है. हालांकि, इस बार हुई भारी बरसात से जमीन की नमी कुछ क्षेत्रों में फसलों के लिए काम आ रही है, लेकिन आने वाले दिनों में यदि बारिश नहीं हुई तो नुकसान अधिक होने की संभावना है.

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