कर्नाटक में गुटखा-पान मसाला बैन से सुपारी किसानों की बढ़ी चिंता, कारोबार हो सकता है प्रभावित

कर्नाटक में गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध के बाद सुपारी किसानों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है. CAMPCO ने सरकार से कहा है कि तंबाकू-निकोटीन वाले उत्पादों पर कार्रवाई का असर वैध सुपारी कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए. कर्नाटक देश का सबसे बड़ा सुपारी उत्पादक राज्य है और इस कारोबार से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का GST मिलता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 13 Aug, 2026 | 09:03 AM

कर्नाटक सरकार के गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध के बाद सुपारी किसानों और वैध सुपारी कारोबार को लेकर चिंता बढ़ गई है. सेंट्रल एरेकानट एंड कोकोआ मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव (CAMPCO) ने सरकार से अपील की है कि इस प्रतिबंध का असर सुपारी की खेती और वैध कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए. दरअसल, कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 10 अगस्त को तंबाकू और निकोटीन वाले उत्पादों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई है. यह प्रतिबंध जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लगाया गया है और एक साल तक लागू रहेगा. CAMPCO ने कहा कि इस फैसले का असर वैध सुपारी व्यापार और किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए.

CAMPCO के अध्यक्ष एसआर सतीशचंद्र ने बिजनेसलाइन से कहा कि सुपारी कर्नाटक समेत देश के कई हिस्सों में किसानों की आय का अहम जरिया है. लोकसभा में दिए गए हालिया जवाब के मुताबिक, 2021-22 से 2025-26 के बीच देश के कुल सुपारी उत्पादन में कर्नाटक की हिस्सेदारी 75.47 फीसदी रही, जबकि कुल रकबे में राज्य की हिस्सेदारी 71.56 फीसदी थी. उन्होंने कहा कि CAMPCO सरकार के जनस्वास्थ्य से जुड़े फैसले और तंबाकू-निकोटीन वाले उत्पादों पर कार्रवाई का सम्मान करता है. हालांकि, सुपारी एक कृषि उपज है, जबकि गुटखा और पान मसाला तंबाकू व निकोटीन वाले उत्पाद हैं. इसलिए प्रतिबंध लागू करते समय दोनों के बीच साफ अंतर रखा जाना चाहिए. इसका असर सुपारी किसानों और वैध सुपारी कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए.

कर्नाटक में सुपारी कारोबार से GST कलेक्शन बढ़ा

CAMPCO के अध्यक्ष एसआर सतीशचंद्र ने कहा कि तंबाकू या निकोटीन वाले उत्पादों में सुपारी के इस्तेमाल के लिए किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई का फोकस प्रतिबंधित उत्पादों पर होना चाहिए, न कि वैध सुपारी कारोबार और किसानों की आजीविका पर. लोकसभा में हाल ही में दिए गए वित्त मंत्रालय के जवाब के मुताबिक, कर्नाटक में सुपारी और सुपारी से बने उत्पादों की बिक्री से GST कलेक्शन लगातार बढ़ा है. राज्य को 2021-22 में 172.62 करोड़ रुपये, 2022-23 में 266.82 करोड़ रुपये, 2023-24 में 326.57 करोड़ रुपये, 2024-25 में 313.16 करोड़ रुपये और 2025-26 में 379.34 करोड़ रुपये GST मिला.

सुपारी कारोबार राज्य की अर्थव्यवस्था में अहम

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भी कर्नाटक से इस कारोबार पर 90.02 करोड़ रुपये का GST कलेक्शन हुआ. सतीशचंद्र ने कहा कि कर्नाटक का देश में सबसे ज्यादा राज्यवार GST कलेक्शन इस बात को दिखाता है कि सुपारी और इससे जुड़े कारोबार का राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान है. इसलिए गुटखा और निकोटीन वाले उत्पादों पर कार्रवाई का असर वैध सुपारी कारोबार और किसानों की आय पर नहीं पड़ना चाहिए.

प्रतिबंध के नाम पर सुपारी किसानों को न करें परेशान

ऑल-इंडिया एरेका नट ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश पुच्चप्पडी ने कहा कि तंबाकू और निकोटीन  वाले प्रतिबंधित उत्पादों पर कार्रवाई के दौरान सुपारी की खेती और वैध कारोबार को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए, ताकि प्रतिबंध सिर्फ उन उत्पादों तक सीमित रहे, जिनमें तंबाकू और निकोटीन का इस्तेमाल होता है. इसका असर सुपारी की खेती, खरीद, प्रोसेसिंग और वैध कारोबार पर नहीं पड़ना चाहिए. किसानों को प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

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