Kharif Crop Advisory: देश के कई हिस्सों में मॉनसून की दस्तक के साथ ही किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार काफी हद तक सही समय पर बुवाई पर निर्भर करती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, केवल बारिश शुरू होते ही बीज बो देना सही नहीं होता. अगर खेत में पर्याप्त नमी न हो या बुवाई जल्दबाजी में कर दी जाए तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
मॉनसून की पहली बारिश में न करें बुवाई
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, कई किसान प्री-मॉनसून या शुरुआती बारिश होते ही बुवाई शुरू कर देते हैं. लेकिन यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है. शुरुआती बारिश के बाद अगर लंबे समय तक पानी नहीं बरसता, तो बीज अंकुरित होने के बाद सूख सकते हैं और फसल प्रभावित हो सकती है. इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि पर्याप्त वर्षा होने और खेत में अच्छी नमी बनने के बाद ही बुवाई शुरू करें.
बुवाई से पहले खेत की तैयारी है जरूरी
अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सही समय पर बुवाई. विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को बारिश से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर लेनी चाहिए. जुताई करने से खरपतवार और पुरानी फसल के अवशेष नष्ट हो जाते हैं. साथ ही खेत को समतल करने से वर्षा का पानी पूरे खेत में समान रूप से फैलता है. खेत में सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. इसके अलावा जल निकासी की उचित व्यवस्था भी करनी चाहिए ताकि जरूरत से ज्यादा पानी खेत में जमा न हो.
कितनी बारिश के बाद करें बुवाई?
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सामान्य तौर पर 50 से 75 मिलीमीटर बारिश होने के बाद खेत में बुवाई के लिए पर्याप्त नमी बनती है. केवल एक दिन की तेज बारिश देखकर बुवाई शुरू नहीं करनी चाहिए. बारिश के बाद यह देखना जरूरी है कि, मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी है या नहीं. अगर नमी पर्याप्त नहीं होगी तो बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है.
मिट्टी में 10 से 15 सेंटीमीटर तक हो नमी
हर क्षेत्र की मिट्टी अलग होती है. कहीं काली मिट्टी होती है तो कहीं लाल, रेतीली या पथरीली मिट्टी. सभी प्रकार की मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता भी अलग-अलग होती है. ऐसे में किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मिट्टी में नमी कम से कम 10 से 15 सेंटीमीटर गहराई तक पहुंच गई हो. तभी बुवाई करना फायदेमंद माना जाता है.
ऐसे करें खेत की नमी की जांच
- किसान बिना किसी उपकरण के भी खेत की नमी की जांच कर सकते हैं. इसके लिए खेत की मिट्टी हाथ में लेकर मुट्ठी में दबाएं.
- अगर मिट्टी दबाने पर तुरंत बिखर जाए तो समझिए कि नमी अभी कम है और बुवाई के लिए इंतजार करना चाहिए.
- अगर मिट्टी का गोला बन जाए और हल्का दबाने पर टूट जाए तो यह बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति मानी जाती है.
- वहीं अगर मिट्टी हाथ में चिपकने लगे और कीचड़ जैसी दिखाई दे, तो इसका मतलब है कि खेत में नमी जरूरत से ज्यादा है. ऐसी स्थिति में कुछ दिन इंतजार करना बेहतर रहेगा.
सही समय पर बुवाई से मिलेगा बेहतर उत्पादन
खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सही समय, पर्याप्त नमी और खेत की उचित तैयारी बेहद जरूरी है. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखकर बुवाई करते हैं तो फसल की बढ़वार अच्छी होगी और उत्पादन भी बेहतर मिलेगा. इसलिए मॉनसून की शुरुआत में जल्दबाजी करने के बजाय मौसम और खेत की स्थिति को देखकर ही बुवाई का फैसला करें.