Maize Farming: मक्का की फसल में इन दिनों फॉल आर्मी वर्म यानी खतरनाक इल्ली का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन रहा है. यह कीट पौधों की बढ़वार रोकने के साथ तने और पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है. कई बार इल्ली पौधे के अंदर तक पहुंचकर उसे खोखला कर देती है, जिससे भुट्टे देर से आते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है.
फसल की ग्रोथ रोक देती है इल्ली
फॉल आर्मी वर्म मक्का की फसल के लिए बेहद नुकसानदायक कीट माना जाता है. शुरुआती अवस्था में यह कोमल पत्तियों को खाता है और पत्तियों पर छेद दिखाई देने लगते हैं. धीरे-धीरे इसका प्रकोप बढ़ने पर पौधे की बढ़वार रुक जाती है. कई मामलों में इल्ली तने के अंदर पहुंचकर उसे खोखला कर देती है. इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और भुट्टे आने में देरी होती है. यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो दाने भरने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है.
खेत की नियमित निगरानी जरूरी
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मक्का के खेतों का नियमित निरीक्षण करें. खासकर पौधे के बीच वाले हिस्से, नई पत्तियों और तने के आसपास इल्ली या उसके मल जैसे अवशेषों की जांच करनी चाहिए. छोटी अवस्था में कीट की पहचान होने पर नियंत्रण करना आसान होता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती प्रकोप को नजरअंदाज करने से बाद में कीट तेजी से फैल सकता है और बड़े क्षेत्र में फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.
छोटी और बड़ी फसल में ऐसे करें छिड़काव
छोटी फसल में स्प्रे पंप की मदद से कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है. वहीं, जब फसल बड़ी हो जाए और खेत में प्रवेश करना मुश्किल हो, तो ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव समय और लागत दोनों बचा सकता है. हालांकि, छिड़काव करते समय दवा की सही मात्रा, पानी की मात्रा और पत्तियों के बीच दवा पहुंचने का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. बिना सलाह के अधिक मात्रा में कीटनाशक का प्रयोग फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.
इन दवाओं से किया जा सकता है नियंत्रण
डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, फॉल आर्मी वर्म के नियंत्रण के लिए Emamectin Benzoate 5 SG, Chlorantraniliprole 18.5 SC और Spinetoram 11.7 SC जैसी अनुशंसित कीटनाशक दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. इनका इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ की सलाह और उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए. कम संख्या में छोटी इल्ली दिखाई देने पर पौधे के बीच रेत डालकर भी शुरुआती नियंत्रण किया जा सकता है. समय पर निगरानी और उचित उपचार से मक्का की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है.