धान छोड़ मक्का बोया है? एक कीट घटा सकता है पूरी पैदावार, अभी हो जाएं सतर्क

कम बारिश के बीच मक्के की फसल तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घुटने वाली अवस्था में फॉल आर्मी वर्म सबसे बड़ा खतरा बन जाता है. पत्तियों में छोटे छेद, बीट या लार्वा दिखते ही तुरंत निगरानी और अनुशंसित दवा का छिड़काव कर फसल बचाई जा सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Aug, 2026 | 06:00 AM

Maize Farming: मॉनसून में कम बारिश के कारण इस बार कई किसानों ने धान की जगह मक्के की खेती को विकल्प बनाया है. कई क्षेत्रों में मक्के की फसल अब घुटने तक की अवस्था में पहुंच चुकी है, जो फॉल आर्मी वर्म के हमले का सबसे संवेदनशील समय माना जाता है. कृषि विभाग के अनुसार यदि इस कीट की शुरुआती पहचान कर समय पर नियंत्रण किया जाए तो उत्पादन में होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है. डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार किसानों को नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करते हुए पत्तियों में छेद, लार्वा और कीट की बीट जैसे लक्षण दिखाई देते ही अनुशंसित उपाय अपनाने चाहिए.

घुटने तक की फसल पर सबसे ज्यादा रहता है खतरा

मक्के की फसल  जब घुटने तक की ऊंचाई पर होती है, तब उसकी पत्तियां कोमल और मुलायम रहती हैं. यही अवस्था फॉल आर्मी वर्म के लिए सबसे अनुकूल होती है. यह कीट पौधे की नई पत्तियों और बढ़वार वाले हिस्से पर हमला कर उन्हें अंदर से काटता है. यदि समय रहते रोकथाम नहीं की गई तो पौधे की वृद्धि प्रभावित होती है और दानों की संख्या व उत्पादन दोनों में कमी आ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि पौधा बड़ा होने और पत्तियां सख्त होने के बाद इस कीट का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो जाता है, इसलिए शुरुआती अवस्था सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.

ऐसे पहचानें फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप

किसानों को सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार खेत का निरीक्षण करना चाहिए. प्रकोप के शुरुआती लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं.

  • पत्तियों पर कतारनुमा छोटे-छोटे छेद दिखाई देना
  • बीच वाली मुड़ी हुई पत्ती का कटा या फटा होना
  • पत्तियों की कुंडी (व्हॉर्ल) में भूरे रंग की कीट की बीट मिलना
  • पत्तियों के भीतर हरे या भूरे रंग का लार्वा दिखाई देना

इन संकेतों के मिलते ही तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है, क्योंकि यह कीट तेजी से एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलता है.

नियंत्रण के लिए क्या करें?

डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार फॉल आर्मी वर्म के प्रभावी नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशी का सही मात्रा में उपयोग करना चाहिए. कोराजन (Coragen) की 10 मिलीलीटर मात्रा को 15 लीटर पानी में घोलकर समान रूप से छिड़काव किया जा सकता है. छिड़काव करते समय विशेष ध्यान रखें कि दवा पौधे के बीच वाले हिस्से और पत्तियों  की कुंडी तक पहुंचे, क्योंकि यही स्थान लार्वा का मुख्य ठिकाना होता है. आवश्यकता होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है.

नियमित निगरानी ही सबसे बड़ा बचाव

फॉल आर्मी वर्म एक अत्यंत तेजी से फैलने वाला कीट है, इसलिए केवल दवा पर निर्भर रहने के बजाय खेत की लगातार निगरानी सबसे प्रभावी रणनीति मानी जाती है. खरपतवार नियंत्रण, संतुलित पोषण  और समय पर निरीक्षण से भी प्रकोप का जोखिम कम किया जा सकता है. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि घुटने तक की अवस्था वाले मक्के के खेतों पर विशेष नजर रखें. जैसे ही पत्तियों में असामान्य छेद, बीट या लार्वा दिखाई दें, तुरंत अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएं. सही समय पर पहचान और उपचार से फसल, उत्पादन और किसानों की मेहनत-तीनों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

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Published: 22 Aug, 2026 | 06:00 AM