15 जुलाई तक करें मक्के की बुवाई, स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती से बढ़ सकती है किसानों की कमाई

Maize Farming: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान 15 जुलाई तक मक्के की बुवाई कर सकते हैं. सामान्य मक्के के साथ स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती कम समय में अधिक मुनाफा दिला सकती है. स्वीट कॉर्न करीब 60 दिनों में तैयार हो जाता है, जबकि बेबी कॉर्न की होटल और फूड इंडस्ट्री में अच्छी मांग रहती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 9 Jul, 2026 | 06:00 AM

Maize Sowing: मॉनसून शुरू होते ही किसान खरीफ फसलों की बुवाई में जुट जाते हैं. ऐसे में अगर आप अभी तक मक्के की बुवाई नहीं कर पाए हैं, तो चिंता की बात नहीं है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 15 जुलाई तक मक्के की बुवाई की जा सकती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, वे इस समय भी मक्के की खेती शुरू करके अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अब सिर्फ सामान्य मक्का ही नहीं, बल्कि स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती भी किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प बन रही है.

सिर्फ 60 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की मांग तेजी से बढ़ रही है. स्वीट कॉर्न का उपयोग घरों, मॉल, फूड स्टॉल और प्रोसेस्ड फूड में खूब किया जाता है. वहीं बेबी कॉर्न की मांग होटल, रेस्टोरेंट और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में लगातार बनी रहती है. स्वीट कॉर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी फसल करीब 60 दिनों में तैयार हो जाती है. यानी किसान कम समय में फसल बेचकर जल्दी आय प्राप्त कर सकते हैं. अगर किसान बेबी कॉर्न की बुवाई अलग-अलग समय पर करें, तो पूरे साल अलग-अलग चरणों में उत्पादन लेकर नियमित कमाई भी कर सकते हैं.

अम्लीय मिट्टी में पहले करें सुधार

कई इलाकों में मक्के की पैदावार कम होने की एक बड़ी वजह अम्लीय (एसिडिक) मिट्टी है. ऐसी मिट्टी में पौधों की जड़ें पोषक तत्वों को अच्छी तरह नहीं ले पातीं, जिससे पौधों की बढ़वार कमजोर रहती है और उत्पादन घट जाता है. इसलिए मक्के की बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराना और जरूरत पड़ने पर उसका उपचार करना बेहद जरूरी है. इससे फसल की अच्छी शुरुआत होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है.

बुवाई से पहले अपनाएं ये आसान उपाय

मक्के की बुवाई से 30 से 40 दिन पहले खेत में बुझा हुआ चूना या डोलोमाइट पाउडर डालना फायदेमंद रहता है. करीब 5 किलोग्राम प्रति कट्ठा की दर से इसका इस्तेमाल करने से मिट्टी की अम्लीयता कम होती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं. इसके अलावा खेत में मेढ़ या उठी हुई क्यारियां बनाकर बुवाई करने से पानी की निकासी बेहतर रहती है. इससे बारिश के दौरान खेत में जलभराव नहीं होता और पौधों की बढ़वार अच्छी बनी रहती है.

सही प्रबंधन से मिलेगा बेहतर उत्पादन

अगर किसान सही समय पर बुवाई करें, मिट्टी का उपचार करें और जरूरत के अनुसार सिंचाई की व्यवस्था रखें, तो मक्के की खेती से अच्छी पैदावार ली जा सकती है. आज के समय में सिर्फ पारंपरिक मक्का ही नहीं, बल्कि स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न जैसी उन्नत किस्मों की खेती भी किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन रही है. कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसान कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

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Published: 9 Jul, 2026 | 06:00 AM

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