Madhya Pradesh Succes Farmer Ramesh Sathate: मध्य प्रदेश के किसान रमेश सातहाते ने मक्का किस्म स्वीटकॉर्न की खेती से मोटी कमाई हासिल करने में कामयाबी हासिल की है. किसान स्वीटकॉर्न की खेती से प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये तक का प्रॉफिट हासिल कर रहे हैं. व्यापारी उनके खेत से ही उपज खरीदकर ले जा रहे हैं और उन्हें बाजार जाकर बेचने की भी जरूरत नहीं पड़ रही है. किसान रमेश ने कहा कि अन्य किसानों को भी उन्नत किस्मों की खेती करनी चाहिए और इसके लिए कृषि विभाग से ट्रेनिंग लेना भी जरूरी है, ताकि उनकी कमाई ज्यादा हो सके और लागत घट सके. किसान रमेश को उनकी सफलता को देखकर इलाके के लोग उन्हें चैंपियन किसान भी कहते हैं.
स्वीटकॉर्न की खेती से कमाई 10 लाख रुपये
मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. किसान कृषि के क्षेत्र में नवाचार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे हैं. मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के अनुसार पांढुर्णा जिले के ग्राम राजना के प्रगतिशील किसान रमेश सातहाते ने नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. उन्होंने सात एकड़ में स्वीटकॉर्न फसल से 10 लाख रुपए से अधिक का मुनाफा कमाया है. वह प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये का शुद्ध लाभ हासिल कर पा रहे हैं.
30 हजार खर्चा पर कमाई डेढ़ लाख
किसान रमेश ने कहा कि अक्टूबर महीने में लगाई गई स्वीटकॉर्न की फसल को व्यापारी खेत से ही 15 रुपये प्रति किलो की दर पर खरीद रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी उपज को रायपुर और नागपुर के व्यापारी खरीद कर ले जा रहे हैं. प्रति एकड़ लगभग 120 क्विंटल की उपज मिल रही हैं. लगभग 30 हजार रुपये का खर्चा काटकर भी डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ का मुनाफा मिल रहा है. इस प्रकार के नवाचारी किसान जिले के अन्य किसानों के लिये भी प्रेरणास्रोत हैं.
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किसान रमेश ने 7 एकड़ में स्वीटकॉर्न की खेती की है.
100 एकड़ में की जा रही स्वीटकॉर्न की खेती
कृषि विभाग के अनुसार स्वीटकॉर्न की खेती से हो रहे ज्यादा मुनाफे के चलते किसान रमेश की तरह अन्य किसानों ने भी इसकी खेती अपनानी शुरू कर दी है. पांढुर्णा जिले के राजना गांव, सिवनी गांव समेत करीब एक दर्जन गांवों के लगभग 50 किसानों ने स्वीटकॉर्न की खेती की है. इन गांवों में 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में स्वीटकॉर्न की फसल रबी सीजन में बोई गई है.
65-80 दिनों में तैयार हो जाती है स्वीटकॉर्न की फसल
कृषि विभाग के अनुसार स्वीटकॉर्न की खेती के लिए हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी बुवाई रबी–खरीफ दोनों मौसमों में की जा सकती है, लेकिन अधिक पैदावार के लिए खरीफ में जून–जुलाई और रबी में अक्टूबर–नवंबर का समय बेहतर होता है. खेत की तैयारी के लिए 2–3 गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें और अंतिम जुताई के समय 10–15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिला दें.स्वीटकॉर्न फसल में प्रति हेक्टेयर 120–150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश की जरूरत होती है. स्वीटकॉर्न की फसल 65–80 दिनों में तैयार हो जाती है.