उद्यान विभाग टमाटर की खेती को दे रहा बढ़ावा, पर झुलसा रोग से परेशान हैं किसान.. करें इस दवा का छिड़काव

मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण टमाटर की फसल में बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे किसान परेशान हैं. थोड़ी सी लापरवाही से फसल को भारी नुकसान हो सकता है. फरवरी में खासकर झुलसा रोग  ज्यादा देखने को मिलता है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और पैदावार कम हो जाती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 16 Feb, 2026 | 05:39 PM

Tomato Farming: आप उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और टमाटर की खेती करने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो अभी आपके आप अच्छा मौका है. क्योंकि टमाटर ऐसी फसल है जिसकी खेती से कम लागत में अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है. ऐसे भी मार्केट में टमाटर की पूरे साल मांग रहती है. बरसात के मौसम में इसकी कीमत कई बार 100 रुपये के पार भी पहुंच जाती है. ऐसे में अगर किसान फरवरी महीने में टमाटर की बुवाई करते हैं, तो जून-जुलाई तक बेहतर कमाई होगी. लेकिन झुलसा रोग किसानों के लिए चुनौती बन रहा है.

अभी लखीमपुर खीरी जिले में उद्यान विभाग टमाटर की खेती को बढ़ावा दे रहा है. विभाग किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दे रहा है और जरूरत पड़ने पर बीज भी मुफ्त उपलब्ध करवा रहा है. इससे नए किसान भी इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं. हालांकि बदलते मौसम और रोग किसानों के लिए चुनौती बने रहते हैं, लेकिन सही जानकारी और समय पर देखभाल से टमाटर की खेती  मुनाफे वाली साबित हो सकती है.

पैदावार में गिरावट आने की संभावना

मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण टमाटर की फसल में बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे किसान परेशान हैं. थोड़ी सी लापरवाही से फसल को भारी नुकसान हो सकता है. फरवरी में खासकर झुलसा रोग  ज्यादा देखने को मिलता है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और पैदावार कम हो जाती है. खास कर टमाटर की फसल में झुलसा रोग का असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है. इससे पैदावार में गिरावट आने की भी संभावना है.

झुलसा रोग के लक्षण और कारण

खेत में ज्यादा नमी होने पर यह रोग तेजी से फैलता है. पौधों की पत्तियों और फलों पर छोटे-छोटे काले धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जिससे टमाटर की गुणवत्ता घटती है और बाजार में सही दाम नहीं मिलता. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धूप, कोहरा और नमी इस रोग को बढ़ावा देते हैं.

झुलसा और बैक्टेरियल स्पॉट से बचाव

यदि टमाटर के पौधों में झुलसा रोग के लक्षण 10 प्रतिशत से अधिक दिखाई दें, तो मेटालैक्सिल और मैंकोजेब  मिश्रित दवा का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए. ज्यादा प्रभावित पौधों के अवशेष तुरंत नष्ट कर दें. इसके अलावा नीम तेल का छिड़काव भी फायदेमंद रहता है. फरवरी में टमाटर की फसल में बैक्टेरियल स्पॉट रोग का खतरा भी बढ़ जाता है. गीले और नम मौसम में यह तेजी से फैलता है और फलों पर काले धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे वे बाजार में बेचने योग्य नहीं रहते. इसके बचाव के लिए फसल चक्र अपनाएं और मैंकोजेब दवा का छिड़काव करें, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके.

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Published: 16 Feb, 2026 | 05:37 PM

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