Wheat Procurement: मध्य प्रदेश सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान गेहूं खरीद के लिए गुणवत्ता नियमों में बदलाव किया है, ताकि खराब मौसम से प्रभावित किसानों को राहत मिल सके. नए नियमों के अनुसार, अधपके (कम विकसित) दानों की सीमा 6 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दी गई है. साथ ही खराब दानों की स्वीकार्य मात्रा भी बढ़ाई गई है. इसके अलावा, कम चमक (लस्टर) वाले गेहूं को भी कुछ शर्तों के साथ खरीद के लिए मंजूरी दी जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि ये बदलाव पानी की कमी और मौसम से जुड़े असर को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं, जिससे इस सीजन में फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है. वहीं, सरकार ने ऐलान किया है कि उड़ खरीदी पर किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी मिलेगा.
इस कदम का मकसद यह है कि खरीद केंद्रों पर फसल की अस्वीकृति कम हो और किसानों को बिना बड़े नुकसान के अपनी उपज बेचने का मौका मिले. इसके साथ ही राज्य सरकार ने खरीद प्रक्रिया को भी बढ़ाया है, यानी संग्रह केंद्रों की क्षमता और कुल खरीद लक्ष्य दोनों को बढ़ा दिया गया है. इसी के साथ सरकार ने दालों और तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कुछ नई योजनाएं शुरू की हैं. उड़द की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जाएगी और किसानों को इसके अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी मिलेगा. साथ ही, सोयाबीन के बाद अब सरसों के लिए भी ‘प्राइस डिफिशिएंसी पेमेंट स्कीम’ लागू करने की योजना बनाई गई है.
90 फीसदी तक मिल रही सब्सिडी
पहले सरकार ने जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे के नियमों में बदलाव किया था, जिसके तहत कुछ स्थितियों में जमीन की कीमत का चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है. राज्य सरकार ने 2026 को किसान कल्याण वर्ष भी घोषित किया है, जिसके तहत किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. इन योजनाओं में सस्ते दाम पर कृषि पंप कनेक्शन और सोलर सिंचाई पंप शामिल हैं, जिन पर किसानों को 90 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है, ताकि वे बिजली पर कम निर्भर रहें. इसके अलावा खाद वितरण व्यवस्था को भी बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि यूरिया और अन्य खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और तकनीक आधारित सिस्टम की मदद से किसानों तक इन्हें आसानी से पहुंचाया जा रहा है.
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गेहूं खरीदी के लिए 3,500 बनाए गए क्रय केंद्र
मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत किसानों को सीधी आर्थिक मदद मिलती रहेगी. इस योजना में पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजे जाते हैं. गेहूं खरीद के लिए राज्य भर में 3,500 से ज्यादा खरीद केंद्र बनाए गए हैं. इस साल खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है और केंद्रों की रोजाना खरीद क्षमता भी बढ़ाई गई है. किसानों को अब अपने जिले के किसी भी खरीद केंद्र पर अपनी फसल बेचने की अनुमति दी गई है.
स्लॉट बुकिंग की समय सीमा भी बढ़ा दी गई
वहीं, स्लॉट बुकिंग की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है और जरूरत पड़ने पर इसे और आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक लाखों किसानों से गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है और उन्हें हजारों करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है. इन कदमों का मकसद खरीद प्रक्रिया को आसान बनाना और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है.