तीन महीने में प्याज का थोक भाव 160 फीसदी बढ़ा, लासलगांव मंडी में 4550 रुपये क्विंटल पहुंचा रेट

देश में प्याज की सप्लाई पर संकट बढ़ रहा है. भंडारित गर्मियों का स्टॉक तेजी से घट रहा है, जबकि खरीफ प्याज की फसल एक महीने से ज्यादा पिछड़ गई है. लासलगांव में प्याज के भाव करीब 160 फीसदी बढ़े हैं. नासिक में सिर्फ 3 फीसदी रोपाई हुई है. नई फसल की आवक नवंबर तक सीमित रहने से कीमतें ऊंची रह सकती हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 9 Sep, 2026 | 08:14 AM

देश में प्याज की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. गर्मियों में भंडारित प्याज का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है, जबकि खरीफ प्याज की फसल करीब एक महीने से ज्यादा पिछड़ गई है. इससे बाजार में प्याज की कमी का दबाव बढ़ रहा है और थोक भाव तीन महीने से भी कम समय में करीब 160 फीसदी तक बढ़ गए हैं. देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव APMC में प्याज का औसत थोक भाव 22 जून को 1,740 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 5 सितंबर तक बढ़कर 4,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. यह करीब दो साल का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले सितंबर 2024 में प्याज का भाव 4,770 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा था.

महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मॉनसून की बारिश में देरी से खरीफ प्याज की खेती प्रभावित हुई है. इससे फसल की खुदाई और नई प्याज की मंडी आवक में देरी हो रही है. ऐसे में सप्लाई की कमी बनी रही तो नवंबर तक प्याज के दाम ऊंचे रह सकते हैं.

नासिक में खरीफ प्याज की रोपाई पिछड़ी

प्याज की खेती में देरी का सबसे ज्यादा असर नासिक में देखने को मिल रहा है. यहां खरीफ प्याज की खेती  का औसत रकबा करीब 30,000 हेक्टेयर रहता है, लेकिन अब तक सिर्फ 2,358 हेक्टेयर में रोपाई हो पाई है. यानी करीब 3 फीसदी रकबे में ही फसल लग सकी है. आमतौर पर सितंबर की शुरुआत तक किसान करीब 70 फीसदी रोपाई पूरी कर लेते हैं. इस साल बारिश में देरी के कारण खेती काफी पिछड़ गई है. इससे पुराने प्याज के स्टॉक खत्म होने और नई फसल आने के बीच सप्लाई का बड़ा अंतर पैदा हो सकता है.

खरीफ प्याज की आवक नवंबर तक पिछड़ने का अनुमान

आमतौर पर खरीफ प्याज की नई फसल अक्टूबर के मध्य से मंडियों में पहुंचने लगती है. इस बार रोपाई में देरी के कारण नई फसल की आवक  भी प्रभावित होने की आशंका है. कृषि अधिकारियों के मुताबिक, प्याज की बड़ी आवक नवंबर के दूसरे हिस्से में ही शुरू होने की उम्मीद है. दिसंबर से बाजार में सप्लाई सामान्य होने की संभावना है. देरी से आए मॉनसून ने महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीफ प्याज की खेती प्रभावित की है.

कर्नाटक-राजस्थान में खुदाई एक महीने पिछड़ी

नेशनल हॉर्टिकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के पूर्व निदेशक आरपी गुप्ता ने द टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि खरीफ प्याज की रोपाई करीब एक महीने पिछड़ गई है. इससे नवंबर के मध्य तक प्याज की सप्लाई सीमित रह सकती है और कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं. बेंगलुरु और कर्नूल की मंडियों में नई प्याज की थोड़ी आवक शुरू हुई है, लेकिन मात्रा अभी काफी कम है. कर्नाटक और राजस्थान में भी प्याज की खुदाई करीब एक महीने देर से हो रही है. इन राज्यों से अक्टूबर के अंत से सप्लाई धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है, जबकि नियमित आवक नवंबर के अंत तक ही सामान्य हो सकती है.

प्याज के भंडारण की क्षमता करीब 24 लाख टन

कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, नासिक में गर्मियों के प्याज के भंडारण  की क्षमता करीब 24 लाख टन है. इसमें से लगभग 80 फीसदी स्टॉक बिक चुका है और अब सिर्फ 5-6 लाख टन प्याज बचा है. अधिकारियों का अनुमान है कि यह स्टॉक सितंबर के अंत या अक्टूबर के मध्य तक ही चल सकता है. अगर इसके बाद भी खरीफ प्याज की पर्याप्त आवक शुरू नहीं हुई, तो बाजार में 3-4 हफ्ते तक प्याज की सप्लाई का संकट पैदा हो सकता है. इससे कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका है.

 

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 9 Sep, 2026 | 08:00 AM

लेटेस्ट न्यूज़