गर्मी में मूंगफली की खेती से होगी तगड़ी कमाई, किसान जरूर अपनाएं ये असरदार तरीका

मई और जून में मूंगफली की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. सही मिट्टी, गोबर की खाद, समय पर निराई-गुड़ाई और दीमक से बचाव के आसान उपाय अपनाकर किसान बेहतर पैदावार और ज्यादा कमाई हासिल कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 10 May, 2026 | 05:12 PM

Peanut Farming: गर्मी के मौसम में किसान ऐसी फसल की तलाश करते हैं जो तेज तापमान में भी अच्छी पैदावार दे और कम लागत में ज्यादा मुनाफा दिला सके. ऐसे में मूंगफली की खेती किसानों के लिए शानदार विकल्प बनकर सामने आ रही है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मई और जून का समय मूंगफली की खेती के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. सही मिट्टी, उन्नत बीज और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं. खास बात यह है कि यह फसल तेज गर्मी को आसानी से सहन कर लेती है और बाजार में इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं.

खेती के लिए सही मिट्टी और खेत की तैयारी जरूरी

मूंगफली की खेती के लिए भुरभुरी दोमट और बलुई दोमट मिट्टी  सबसे अच्छी मानी जाती है. खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि ज्यादा नमी से फसल खराब हो सकती है. खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करना जरूरी है. पहले मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें, फिर दो बार कल्टीवेटर चलाकर खेत को समतल बना लें. विशेषज्ञों का कहना है कि खेत जितना समतल और नरम होगा, पौधों की जड़ें उतनी मजबूत बनेंगी. इससे दानों का आकार और गुणवत्ता बेहतर होगी. किसान अगर शुरुआत से ही खेत की तैयारी सही तरीके से करें तो उत्पादन में बड़ा फायदा मिल सकता है.

गोबर की खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत

अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का उपजाऊ  होना बेहद जरूरी है. इसलिए खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद डालना बहुत फायदेमंद माना जाता है. एक हेक्टेयर खेत में करीब 5 टन गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी मजबूत होती है और पौधों को जरूरी पोषण मिलता है. मूंगफली खरीफ फसल मानी जाती है, इसलिए इसमें बहुत ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती. अगर मौसम में पर्याप्त बारिश हो रही हो तो अतिरिक्त पानी देने से बचना चाहिए. हालांकि पौधों में फूल आने के समय अगर सूखे जैसी स्थिति बने तो हल्की सिंचाई करना जरूरी होता है. सही समय पर पानी मिलने से दानों का विकास तेजी से होता है और उत्पादन बढ़ता है.

निराई-गुड़ाई से फसल रहेगी स्वस्थ

मूंगफली की खेती  में खरपतवार सबसे बड़ी समस्या मानी जाती है. अगर समय रहते खेत की सफाई न की जाए तो पौधों की बढ़त रुक सकती है. इसलिए बुवाई के करीब तीन हफ्ते बाद पहली निराई-गुड़ाई जरूर करनी चाहिए. इसके बाद 30 से 40 दिन के बीच दूसरी बार खेत की सफाई करना फायदेमंद रहता है. इस प्रक्रिया से पौधों को पर्याप्त हवा और पोषण मिलता है. साथ ही खेत में नमी भी संतुलित बनी रहती है. जरूरत पड़ने पर खरपतवार नियंत्रण के लिए कीटनाशक का सीमित इस्तेमाल भी किया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित देखभाल करने वाले किसानों को ज्यादा और बेहतर उत्पादन मिलता है.

दीमक से बचाव के लिए अपनाएं आसान उपाय

मूंगफली की फसल में दीमक का खतरा  सबसे ज्यादा रहता है. यह समस्या मिट्टी के अंदर से शुरू होती है और धीरे-धीरे पूरे पौधे को नुकसान पहुंचा सकती है. इससे बचने के लिए खेत में नीम की खली मिलाना बेहद असरदार माना गया है. नीम की खली मिट्टी को प्राकृतिक रूप से सुरक्षित बनाती है और दीमक की समस्या को कम करती है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत रहती हैं और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है. कृषि विशेषज्ञों का दावा है कि इस तरीके को अपनाने से पैदावार में करीब 18 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है. मूंगफली की उन्नत किस्मों की बात करें तो मल्लिका, जेएल-24, जीजी-2 और कादिरी-3 जैसी किस्में किसानों के लिए काफी फायदेमंद मानी जा रही हैं. ये किस्में करीब 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं और अच्छी गुणवत्ता के दाने देती हैं. सही तकनीक और समय पर देखभाल से किसान गर्मी के मौसम में भी शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.

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Published: 10 May, 2026 | 05:12 PM
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