धान-मक्का छोड़ पिपरमेंट की खेती पर क्यों शिफ्ट हो रहे किसान? जानिए लागत और मुनाफे का गणित

जिन इलाकों में नीलगाय फसलों को नुकसान पहुंचाती है, वहां पिपरमेंट की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन रही है. कम लागत, कम जोखिम और अच्छी बाजार मांग के कारण यह फसल तेजी से लोकप्रिय हो रही है. सही तकनीक अपनाकर किसान बेहतर आय हासिल कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Jul, 2026 | 12:03 PM

Peppermint Farming: खेतों में नीलगाय और अन्य जंगली जानवरों की वजह से हर साल बड़ी मात्रा में फसलें खराब हो जाती हैं. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में पिपरमेंट और दूसरी सुगंधित (एरोमैटिक) फसलों की खेती एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, पिपरमेंट ऐसी फसल है जिसे नीलगाय आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाती. यही वजह है कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों का खतरा ज्यादा है, वहां किसान इस खेती को अपनाकर जोखिम कम करने के साथ बेहतर कमाई भी कर सकते हैं.

कम लागत में शुरू हो सकती है खेती

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार बताते हैं कि पिपरमेंट की खेती  बहुत अधिक लागत वाली नहीं है. एक एकड़ में इसकी खेती शुरू करने के लिए लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आ सकता है. फसल तैयार होने के बाद इसकी पत्तियों से आवश्यक तेल (एसेंशियल ऑयल) निकाला जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है. यदि किसान आधुनिक तकनीकों का उपयोग करें और समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा पौधों की देखभाल करें, तो उत्पादन बेहतर मिलता है. यह खेती कम समय में अच्छा रिटर्न देने वाली फसलों में गिनी जाती है.

तेल निकालने की यूनिट बढ़ाती है कमाई

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि किसान समूह बनाकर या व्यक्तिगत स्तर पर डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित कर लें, तो उनकी आय और बढ़ सकती है. इससे पत्तियों को बाहर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती और खेत से ही आवश्यक तेल तैयार किया जा सकता है. पिपरमेंट के अलावा लेमन ग्रास, तुलसी, खस जैसी अन्य एरोमैटिक फसलों का तेल भी इसी तकनीक से निकाला जा सकता है. इन उत्पादों की दवा, कॉस्मेटिक, खाद्य और सुगंध  उद्योग में लगातार मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार मिल सकता है.

एक एकड़ से मिल सकता है बेहतर मुनाफा

कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के मुताबिक, एक एकड़ में पिपरमेंट की अच्छी फसल से लगभग 80 से 90 लीटर तक आवश्यक तेल प्राप्त हो सकता है. बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और मांग के अनुसार लगभग 800 से 1000 रुपये प्रति लीटर तक मिल सकती है. ऐसे में सही उत्पादन और विपणन के साथ किसान अपनी लागत से करीब तीन गुना तक मुनाफा कमा सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को बार-बार नुकसान होता है, वहां पिपरमेंट और दूसरी सुगंधित फसलों की खेती  किसानों के लिए सुरक्षित, लाभदायक और टिकाऊ विकल्प साबित हो सकती है. इससे खेती का जोखिम घटेगा और किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

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