बिहार के 17 जिलों में होगा तालाबों का निर्माण, किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा

कृषि मंत्री ने कहा कि इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य केवल पानी की बचत या जल संकट को हल करना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना भी है.

नोएडा | Published: 30 Aug, 2025 | 10:43 PM

खेती करने वाले किसानो के लिए बहुत जरूरी है कि वे अपनी फसलों को सही पोषण और पर्याप्त पानी दें. लेकिन आज लगातार बदलते मौसम में घटते जलस्तर के कारण किसानों के सामने फसलों की सिंचाई की समस्या सामने आकर खड़ी हो जाती है. ऐसे में बिहार सरकार ने प्रदेश के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा देने और भू-जल स्तर को बचाने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है. बता दें कि इस योजना के तहत दक्षिण बिहार के 17 जिलों में बड़े पैमाने पर तालाबों और जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है. प्रदेश सरकार की इस पहल से किसानों को निश्चित तौर पर भरपूर मात्रा में पानी मिलने के साथ ही जल संरक्षण भी हो सकेगा.

दक्षिण बिहार के 17 जिलों में बनेंगे तालाब

बिहार कृषि विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार, विभाग के भूमि संरक्षण निदेशालय की तरफ से इस योजना की शुरुआत की गई है. जिसमें तालाब निर्माण के लिए दक्षिण बिहार के 17 जिलों का चुनाव किया गया है. इनमें अरवल, औरंगाबाद, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, गया, जमुई, जहानाबाद, नवादा, नालंदा, रोहतास, कैमूर, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, पटना और बांका जैसे जिले शामिल हैं. बता दें कि, इस योजना की मदद से अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी बरसने का इंतजार नहीं करना होगा. तालाबों में जमा पानी से सालभर सिंचाई की जा सकेगी, जिससे फसल की पैदावार बढ़ेगी.

जल संकट को दूर करने का उद्देश्य

प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना का उद्देश्य आने वाले समय में पानी की समस्या यानी जल संकट को दूर करना है. उन्होंने बताया कि इन तालाबों को बनाने से जमीन के जलस्तर में सुधार आएगा. क्योंकि इस तरह के निर्माण से जमीन के जल स्तर को दोबारा से सामान्य करने या बढ़ाने में मदद मिलती है. विजय सिन्हा ने कहा कि प्रदेश सरकार की ये योजना न केवल वर्तमान में किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि भविष्य में भी किसानों को इसका फायदा मिलेगा.

ग्रामीण क्षेत्र बनेगा आत्मनिर्भर

कृषि मंत्री ने बताया कि इस योजना को शुरू करने के पीछे प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल पान की बचत या जल संकट को दूर करना नहीं है, बल्कि इस योजना की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा. पानी की स्थायी और पक्की व्यवस्था होने से किसानों को सुरक्षित खेती करने में मदद मिलेगी, साथ ही उनकी आमदनी भी बढ़ेगी. उन्होंने बताया कि इस तरह की योजनाएं किसानों के लिए सिंचाई और आय के दोहरे लाभ का रास्ता खोल रही हैं.