पंजाब में अप्रैल से शुरू होगी कपास की बुवाई, कृषि विभाग ने 1.5 लाख हेक्टेयर रखा लक्ष्य.. एक्सपर्ट की बढ़ी चिंता

पंजाब में अप्रैल से कपास बुवाई का सीजन शुरू होगा, लेकिन कीट और मजदूरों की कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है. बीटी2 कपास पिंक बॉलवर्म से प्रभावित है. लगातार फसलें फेल होने और कम मजदूरों की वजह से किसान नए सीजन का जोखिम लेने में हिचक रहे हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Feb, 2026 | 04:02 PM

Cotton Cultivation: पंजाब में अप्रैल महीने से कपास बुवाई का सीजन शुरू हो जाएगा. यानी अप्रैल से किसान कपास की बुवाई करने लगेंगे. लेकिन कपास इलाके में किसानों और विशेषज्ञों के मन में अभी से ही चिंता बढ़ गई है. क्योंकि कीटों का अटैक अभी से ही इलाकों में देखा जा रहा है. साथ ही मजदूरों की भी भारी कमी है. हालांकि, इस साल राज्य कृषि विभाग ने 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोने का लक्ष्य रखा है, जो 2024-25 की खरीफ बुवाई से लगभग 30,000 हेक्टेयर ज्यादा है. 2021 में पंजाब में कपास 2.5 लाख हेक्टेयर में बोया गया था.

राज्य कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने कहा कि खेतों की जांच से पता चला है कि कपास के इलाकों  में मजदूरों की कमी गंभीर हो गई है और यह रुझान पिछले 2-3 साल से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इसका समाधान कपास की कटाई में मैकेनाइजेशन लाना हो सकता है. ब्रार ने कहा कि यह समस्या कीटों के हमले और अनुकूल मौसम न होने की वजह से पैदा हुई है.

पंजाब में कपास की बुवाई लगातार घट रही है

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के अर्धशुष्क दक्षिणी जिलों में कपास की फसल तोड़ने में मुख्य रूप से महिलाएं काम करती हैं. विशेषज्ञों और किसानों का कहना है कि 2021-22 के बाद से पंजाब में कपास की बुवाई  लगातार घटती जा रही है. खेतों में काम कम होने की वजह से मजदूर अब अन्य रोजगार की ओर रुख कर रहे हैं. बठिंडा के बाजक गांव के प्रगतिशील किसान बलदेव सिंह ने कहा कि कपास की फसल में कीट और खराब मौसम की वजह से खेतों में काम कम हो गया है. इस वजह से मजदूर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत गांवों में काम करना पसंद कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि 2021 से लगातार फसलें फेल होने की वजह से गांवों में ‘सिरी’ यानी खेत मजदूर भी कम रह गए हैं. ये मजदूर अब कम मेहनत वाले गैर-कृषि कामों में लगे रहते हैं. फाजिल्का के दानेवाल सतकोसी के किसान गुरजीत सिंह रोमाना ने कहा कि लगातार पांच फसलें असफल होने के बाद किसान अब नए सीजन का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं.

पिंक बॉलवर्म की चपेट आ सकती है फसल

गुरजीत सिंह रोमाना का कहना है कि बीटी2 कपास के बीज खतरनाक पिंक बॉलवर्म की चपेट  में आते हैं. न तो सरकारी संस्थाओं और न ही निजी क्षेत्र ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि फसल सुरक्षित है. ऐसे जोखिम भरे हालात में औसत किसान संदेह में रहता है और कपास की बुवाई का क्षेत्र बढ़ना मुश्किल है, जबकि अर्धशुष्क इलाके के ज्यादातर किसानों के पास कोई अन्य खरीफ फसल लगाने का विकल्प भी कम है.

बीजों पर 33 फीसदी सब्सिडी देती है सरकार

पंजाब में कपास की खेती मुख्य रूप से फाजिल्का, बठिंडा, मानसा और श्री मुक्तसर साहिब जैसे दक्षिण-पश्चिमी जिलों में होती है. 2025 में फसल विविधता प्रयासों के तहत कपास का क्षेत्रफल लगभग 20 फीसदी बढ़कर 2.98 लाख एकड़ हो गया था. राज्य सरकार बीजों पर 33 फीसदी सब्सिडी देती है और बेहतर उत्पादन के लिए जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण, जैसे गुलाबी बॉलवर्म पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

2020 में 50 लाख गांठ से अधिक बंपर उत्पादन हुआ

2020 में 50 लाख गांठ से अधिक बंपर उत्पादन हुआ. हालांकि, गुलाबी बॉलवर्म कीट  और खराब मौसम की वजह से हाल के वर्षों में उत्पादन गिर गया है. 2024-25 में यह घटकर 2.2.98 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रह गया. कीट नियंत्रण के लिए एआई-आधारित परियोजनाओं और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. मुख्य चुनौतियों में जल निकासी की समस्या, कीटों का हमला और पानी की कमी शामिल हैं. ऐसे कपास की खेती के लिए गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी (पीएच 6-8) सबसे अच्छी मानी जाती है. देसी कपास के लिए पौधों के बीच 60×30 सेमी दूरी होनी चाहिए. वहीं, अमेरिकी कपास के लिए सिंचाई वाली जमीन में 75×15 सेमी की दूरी रखने की सलाह दी जाती है.

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Published: 28 Feb, 2026 | 04:00 PM

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