Sugarcane Farming: मई महीने में ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई की जाती है, लेकिन इसकी पैदावार शरद और बसंतकालीन गन्ने की तुलना में थोड़ी कम होती है. पश्चिम चंपारण जिला गन्ने की खेती के लिए एक प्रमुख क्षेत्र माना जाता है, जहां अधिकतर किसान अपनी आजीविका के लिए इसी फसल पर निर्भर रहते हैं. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, यही कारण है कि यहां ग्रीष्मकालीन गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन कम उत्पादन किसानों के लिए चिंता का कारण बनता है.
वैज्ञानिकों की सलाह से बढ़ेगी पैदावार
डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, अगर किसान सही तकनीक और उन्नत किस्मों का चयन करें तो ग्रीष्मकालीन गन्ने की पैदावार को आसानी से बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए पौधों के पोषण प्रबंधन और बुवाई से पहले की तैयारी बेहद जरूरी है. एक महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि गन्ने के टुकड़ों को बुवाई से पहले लगभग 24 घंटे तक पानी में भिगोकर रखना चाहिए. इससे अंकुरण बेहतर होता है और पौधे मजबूत बनते हैं.
शुगरकेन ट्रांसप्लांटिंग तकनीक: आधुनिक खेती का तरीका
किसानों के लिए एक और उपयोगी तकनीक है शुगरकेन ट्रांसप्लांटिंग. इसमें गन्ने के बीजों को पहले ट्रे में उगाया जाता है और जब वे छोटे पौधे बन जाते हैं, तब उन्हें खेतों में लगाया जाता है. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीज की बर्बादी कम होती है और पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. साथ ही फसल का नुकसान भी काफी हद तक कम हो जाता है.
उन्नत किस्मों का चयन है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए. इनमें प्रमुख हैं:
- राजेंद्र गन्ना 01
- राजेंद्र गन्ना 02
- राजेंद्र गन्ना 03
- राजेंद्र गन्ना 04
- राजेंद्र गन्ना 05
- राजेंद्र गन्ना 06
- राजेंद्र गन्ना 07
इनमें से राजेंद्र गन्ना 02 में चीनी की मात्रा अधिक पाई जाती है, जबकि राजेंद्र गन्ना 07 मोटा और लंबा होता है. वहीं राजेंद्र गन्ना 01, 03 और 05 अधिक पैदावार देने के लिए जाने जाते हैं.
सही तकनीक से बढ़ेगा मुनाफा
यदि किसान समय पर सही किस्म का चयन करें, आधुनिक तकनीक अपनाएं और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करें, तो ग्रीष्मकालीन गन्ने की कम पैदावार की समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है. इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार होगा.
ग्रीष्मकालीन गन्ने की खेती चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही जानकारी और तकनीक अपनाकर इसे लाभकारी बनाया जा सकता है. वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत किस्मों का उपयोग किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा दिला सकता है.