बिना जुताई सीधे बुवाई: फसल अवशेष जलाने की जरूरत खत्म, नई मशीनों से खेतों में बढ़ी पैदावार

सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और सीड ड्रिल जैसी उन्नत मशीनों पर सरकार 40% से 50% तक की सब्सिडी दे रही है. ये मशीनें बिना खेत की जुताई सीधे बुवाई करने में सक्षम हैं, जिससे श्रम, समय और लागत—तीनों की बचत हो रही है.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Updated On: 16 Apr, 2026 | 04:40 PM

Agricultural Tools: उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई के लिए किसान आधुनिक तरीके अपनाने की तैयारियों में जुटे हैं. पारंपरिक तरीकों से खेती करने वाले किसानों को बहुत सी मुश्किलों से जूझना पडता है. ऐसे में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और सीड ड्रिल जैसी उन्नत मशीनों ने पारंपरिक तरीकों की मुश्किलों से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत दी है.

पारंपरिक तरीकों की मुश्किलों से जूझ रहे किसान अब आधुनिक कृषि यंत्रों की ओर रुख कर रहे है. इन मशीनों पर सरकार 40% से 50% तक की सब्सिडी दे रही है. सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और सीड ड्रिल जैसी उन्नत मशीनों ने पारंपरिक तरीकों की मुश्किलों से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत दी है. ये मशीनें बिना खेत की जुताई सीधे बुवाई करने में सक्षम हैं, जिससे श्रम, समय और लागत—तीनों की बचत हो रही है. यही कारण है कि किसानों में आधुनिक कृषि यंत्रों की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ रही है.

सुपर सीडर और हैप्पी सीडर

सुपर सीडर और हैप्पी सीडर ने खेती की बुवाई में नवाचार कर दिया है. पहले धान कटने के बाद खेत में भारी मात्रा में पुआल रह जाता था, जिसे हटाने के लिए किसान या तो मजदूरों पर खर्च करते थे या फिर मजबूरी में उसे जलाना पड़ता था. इससे समय, लागत और पर्यावरण—तीनों को नुकसान होता था। लेकिन सुपर सीडर और हैप्पी सीडर ऐसी मशीनें हैं जो बिना पुआल हटाए सीधे गेहूं की बुवाई कर देती हैं.

सुपर सीडर के माध्यम से एक ही बार में जुताई, पुआल मिलाना और बोनी आसानी से की जा सकती है। हैप्पी सीडर पुआल को उठाकर बीज बो देता है और अवशेषों को सतह पर फैला देता है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है. इन मशीनों की वजह से किसानों का समय बचता है और खेती की लागत काफी कम हो गई है। यही कारण है कि किसान इन मशीनों को खेती में क्रांतिकारी परिवर्तन मान रहे हैं.

सीड ड्रिल

सीड ड्रिल मशीन भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह बीज को समान गहराई और सही मात्रा में बोती है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है और पैदावार में वृद्धि होती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जहां पारंपरिक तरीकों से बीजों की बर्बादी और असमान गहराई की समस्या रहती है वहीं ये मशीने बीजों की बर्बादी को रोकती है और बड़े क्षेत्र की बुवाई प्रकिया को आसानी से संभव बनाती है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुपर सीडर, जीरो टिलेज सीडर और सीड ड्रिल जैसी मशीनें खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं. धान कटाई के बाद गेहूं की बुवाई में ये तकनीकें बेहद कारगर साबित हो रही हैं. इनसे यंत्रों से जुताई का खर्च बचता है, मिट्टी की संरचना सुधरती है और उत्पादन में निरंतर बढ़ोतरी देखी जा रही है.

सब्सिडी का लाभ

सरकार इन आधुनिक मशीनों पर 40% से 50% तक की सब्सिडी दे रही है. सामान्य किसानों को 40% और अनुसूचित जनजाति व महिला किसानों को 50% तक लाभ दिया जा है. सुपर सीडर की कीमत ₹1.30 लाख से ₹3 लाख तक है, जिस पर लगभग ₹1.20 लाख तक की सब्सिडी मिल सकती है. इन यंत्रों की खरीद के लिए किसानों को ई-कृषि यंत्र दान पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है. कृषि विभाग द्वारा जारी लक्ष्य और लॉटरी प्रक्रिया के आधार पर किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है.

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Published: 16 Apr, 2026 | 02:37 PM
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