Tips For Tomato Farming: टमाटर की खेती करने वाले किसानों के लिए इन दिनों लीफ कर्ल वायरस बड़ी परेशानी बनता जा रहा है. यह बीमारी धीरे-धीरे पूरी फसल को कमजोर कर देती है और पैदावार पर सीधा असर डालती है. शुरुआत में किसान इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फल छोटे व खराब निकलने लगते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर समय रहते इस वायरस की पहचान और बचाव नहीं किया गया, तो किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. इसलिए खेत की नियमित निगरानी और सही उपाय अपनाना बेहद जरूरी है.
पत्तियां मुड़ना है सबसे बड़ा संकेत
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि लीफ कर्ल वायरस का सबसे पहला असर पौधों की पत्तियों पर दिखाई देता है. संक्रमित पौधों की पत्तियां ऊपर या नीचे की तरफ मुड़ने लगती हैं और धीरे-धीरे सिकुड़ जाती हैं. पौधे की नई पत्तियां छोटी और मोटी दिखाई देने लगती हैं. कई बार पत्तियों की नसें पीली पड़ जाती हैं और पूरा पौधा झाड़ीनुमा दिखने लगता है. अगर बीमारी शुरुआत में ही लग जाए, तो पौधे की बढ़वार लगभग रुक जाती है. ऐसे पौधों में फूल कम आते हैं और फल भी कमजोर बनते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत बचाव करना जरूरी होता है.
सफेद मक्खी तेजी से फैलाती है वायरस
यह बीमारी मुख्य रूप से सफेद मक्खी के जरिए फैलती है. ये कीट संक्रमित पौधों का रस चूसकर स्वस्थ पौधों तक वायरस पहुंचा देता है. गर्म और सूखा मौसम सफेद मक्खियों के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल माना जाता है. ऐसे मौसम में इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है और पूरा खेत कुछ ही दिनों में प्रभावित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार खेत में उगी खरपतवार भी इस वायरस को फैलाने में मदद करती हैं. कई जंगली घासें सफेद मक्खियों के लिए सुरक्षित जगह बन जाती हैं. इसलिए खेत को हमेशा साफ रखना जरूरी होता है. अगर समय रहते सफेद मक्खी पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो वायरस तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है.
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छोटे और बेस्वाद हो जाते हैं टमाटर
लीफ कर्ल वायरस का असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है. संक्रमित पौधों में फूल कम बनते हैं और फल लगने पर भी उनका आकार छोटा रह जाता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, ऐसे टमाटर सख्त और स्वादहीन हो जाते हैं. बाजार में इनकी कीमत भी बहुत कम मिलती है. यह बीमारी 30 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार संक्रमण इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि किसान को पूरी फसल नष्ट करनी पड़ती है. इसी वजह से विशेषज्ञ लगातार किसानों को खेत का निरीक्षण करते रहने की सलाह दे रहे हैं ताकि बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके.
बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार लीफ कर्ल वायरस से बचने के लिए सबसे पहले अच्छी और रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन करना चाहिए. नर्सरी तैयार करते समय पौधों को जालीदार नेट के अंदर रखना फायदेमंद माना जाता है. इससे सफेद मक्खियों का हमला कम होता है. खेत के चारों तरफ मक्का या बाजरा जैसी ऊंची फसलें लगाने से भी मक्खियों का प्रवेश कम किया जा सकता है. साथ ही खेत को खरपतवार मुक्त रखना बेहद जरूरी है.
अगर संक्रमण बढ़ने लगे, तो सफेद मक्खी नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथोक्सम जैसे कीटनाशकों का संतुलित छिड़काव किया जा सकता है. जैविक उपायों में येलो स्टिकी ट्रैप और नीम तेल का इस्तेमाल काफी असरदार माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत प्रबंधन यानी IPM तकनीक अपनानी चाहिए. संक्रमित पौधों को तुरंत खेत से हटाकर नष्ट कर देना चाहिए ताकि बीमारी बाकी पौधों तक न फैल सके. समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी टमाटर की फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं.