ट्रेंच विधि और नई गन्ना किस्म से होगी बंपर कमाई, चीनी मिलों में बढ़ी मांग से किसानों को फायदा

गन्ने की उन्नत किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक कमाई का अवसर बन रही हैं. वैज्ञानिक खेती और ट्रेंच विधि अपनाकर प्रति एकड़ 500 क्विंटल तक उत्पादन संभव बताया जा रहा है. सही बीज, संतुलित खाद और आधुनिक तकनीक से किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Jul, 2026 | 10:29 PM

Sugarcane Farming: गन्ने की खेती अब पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तकनीकों और उन्नत किस्मों की ओर तेजी से बढ़ रही है. सही किस्म का चुनाव ही अधिक उत्पादन और बेहतर आय की कुंजी है. CO 0238, CO 85 और COLK 94184 जैसी उन्नत किस्में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. इन किस्मों में अधिक पैदावार, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बेहतर चीनी रिकवरी जैसे गुण पाए जाते हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिल रहा है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, यदि किसान वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं और सही बीज का चयन करें, तो गन्ने की खेती से प्रति एकड़ 500 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और मिट्टी की स्थिति को देखते हुए उन्नत किस्मों का उपयोग अब जरूरी हो गया है.

CO 85 किस्म बनी किसानों की पहली पसंद

CO 85 किस्म पिछले कई वर्षों से किसानों के लिए भरोसेमंद  विकल्प बनी हुई है. यह किस्म स्थानीय जलवायु के अनुकूल तेजी से ढल जाती है और रोगों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी पाई गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी बढ़वार और अधिक उत्पादन क्षमता है, जिससे एक एकड़ में लगभग 500 क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन संभव हो पाता है. यह गन्ना 18 से 22 फीट तक लंबा हो सकता है, जो इसकी उच्च उत्पादकता को दर्शाता है. इसकी मिठास और रस की गुणवत्ता के कारण चीनी मिलों के साथ-साथ जूस बाजार में भी इसकी मांग काफी अधिक रहती है.

ट्रेंच विधि और बीज उपचार से बढ़ता उत्पादन

गन्ने की बेहतर फसल  के लिए ट्रेंच विधि (Trench Method) को बेहद उपयोगी माना जा रहा है. इस विधि से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे हवा और धूप का सही संचार होता है और पौधों की वृद्धि बेहतर होती है. इससे न केवल उत्पादन बढ़ता है बल्कि रोगों का खतरा भी कम हो जाता है. बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी जरूरी माना जाता है. इससे फसल को शुरुआती अवस्था में कीटों और फफूंद से बचाव मिलता है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही दूरी और वैज्ञानिक विधि अपनाने से गन्ने की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होता है.

संतुलित खाद प्रबंधन से मिलती है मजबूत फसल

गन्ने की खेती में संतुलित पोषण प्रबंधन बेहद जरूरी है. बुवाई से पहले खेत  में जैविक खाद का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. इसके बाद सीमित मात्रा में रासायनिक खाद जैसे डीएपी, यूरिया और सल्फर का प्रयोग किया जाता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग फसल को मजबूत बनाता है और उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है. उनका मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज और सही प्रबंधन अपनाएं, तो गन्ने की खेती उन्हें लगातार बेहतर और स्थिर आय दे सकती है.

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Published: 6 Jul, 2026 | 10:29 PM

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