UP में लीज खेती में बदलाव, अब आसान होगी जमीन डील और तुरंत मिलेगा बैंक कर्ज

उत्तर प्रदेश सरकार खेती की जमीन लीज व्यवस्था को आसान बनाने की तैयारी कर रही है. इससे भूमिहीन और सीमांत किसानों को कानूनी सुरक्षा के साथ बैंक लोन, फसल बीमा और योजनाओं का लाभ मिलेगा. प्रस्ताव में लोन एलिजिबिलिटी कार्ड और मॉडल लैंड लीजिंग एक्ट लागू करने पर विचार शामिल है, जिससे लाखों किसानों को फायदा होगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 28 May, 2026 | 12:17 PM

Agricultural Land Lease: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों के लिए एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. राज्य में खेती की जमीन को लीज पर देने के नियमों को सरल बनाया जा रहा है, ताकि भूमिहीन, बटाईदार और सीमांत किसानों को सीधा फायदा मिल सके. इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद किसानों को न केवल जमीन पर खेती करने का कानूनी अधिकार मिलेगा, बल्कि उन्हें बैंक लोन, फसल बीमा और सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल सकेगा.

भूमिहीन किसानों को मिलेगी कानूनी पहचान

सरकार की इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य उन किसानों को कानूनी सुरक्षा  देना है जो अपनी जमीन के बजाय दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं. अभी तक ऐसे किसानों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना मुश्किल था क्योंकि उनके पास जमीन के स्वामित्व के दस्तावेज नहीं होते थे. नई व्यवस्था के तहत जमीन मालिक अपनी कृषि भूमि को तय समय के लिए लीज पर दे सकेगा और खेती करने वाले किसान को उस भूमि पर निर्बाध अधिकार मिलेगा. इससे खेती करने वाले किसानों को एक स्थायी पहचान मिलेगी और वे सरकारी योजनाओं के लाभार्थी बन सकेंगे.

बैंक लोन और क्रेडिट सिस्टम में बड़ा बदलाव

प्रस्ताव के अनुसार, लीज पर खेती  करने वाले किसानों को तीन साल की वैधता वाला लोन एलिजिबिलिटी कार्ड दिया जा सकता है. इस कार्ड के जरिए किसान बिना जमीन गिरवी रखे बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे. इसके अलावा, नीति आयोग के मॉडल एग्रीकल्चरल लैंड लीजिंग एक्ट-2016 को लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों को संस्थागत क्रेडिट सिस्टम से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में वित्तीय बाधाओं को कम करना है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

जमीन मालिक और किसान दोनों को फायदा

नई व्यवस्था में जमीन मालिकों  को भी फायदा मिलेगा क्योंकि वे अपनी कृषि भूमि को कानूनी रूप से लीज पर दे सकेंगे. वहीं, किसानों को उस भूमि पर खेती करने का पूरा अधिकार मिलेगा. अधिकारियों का मानना है कि इस सिस्टम से एक ही जमीन पर बार-बार गलत तरीके से लोन लेने की समस्या पर रोक लगेगी. भूमि अभिलेखों को आधार से जोड़ने और ऑनलाइन बैंकिंग चार्ज सिस्टम लागू करने पर भी चर्चा चल रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.

लाखों किसानों के लिए नई उम्मीद

उत्तर प्रदेश में 2.38 करोड़ से अधिक जोतधारक हैं और औसत जोत आकार भी काफी छोटा है. ऐसे में ये सुधार लाखों छोटे और सीमांत किसानों  के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है. वित्त विभाग के अनुसार, इस प्रस्ताव पर अभी कानूनी और तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है. यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य में कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इससे भूमिहीन किसानों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना आसान होगा और उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते खुलेंगे.

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