पश्चिम एशिया संकट से कर्नाटक के अंजीर पर संकट, किसानों को हो रहा नुकसान

किसानों ने इस बार खेती में काफी निवेश किया था. सिंचाई, खाद, मजदूरी और देखभाल पर भारी खर्च किया गया था, ताकि बेहतर उत्पादन मिल सके. लेकिन मौजूदा हालात में स्थानीय बाजार में इतनी ज्यादा मात्रा में अंजीर आ जाने से कीमतें तेजी से गिर गई हैं. अब किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 24 Mar, 2026 | 02:28 PM

Fig farmers crisis: कर्नाटक के बल्लारी जिले में इस साल अंजीर की खेती से किसानों को बड़ी उम्मीदें थीं. बेहतर मौसम और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए किसान अच्छी कमाई की उम्मीद कर रहे थे. लेकिन अचानक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब हालात ऐसे बन गए हैं कि किसानों की मेहनत का फल खेतों में ही सड़ने की कगार पर है.

1100 हेक्टेयर में फैली खेती, लेकिन बाजार ठप

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बल्लारी जिले के कुरुगोडु और सिरुगुप्पा तालुक में अंजीर की खेती बड़े पैमाने पर होती है. ये दोनों इलाके कर्नाटक की करीब 80 प्रतिशत अंजीर खेती का केंद्र माने जाते हैं. इस साल करीब 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में अंजीर की खेती की गई थी. किसानों को उम्मीद थी कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छे दाम मिलेंगे और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी.

निर्यात बंद होने से किसानों को बड़ा झटका

अंजीर के प्रमुख खरीदार देशों में ईरान, इराक और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देश शामिल हैं. लेकिन वहां चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण इन देशों को होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कुरुगोडु के एक किसान बताते हैं कि जब से निर्यात बंद हुआ है, तब से उनकी फसल के लिए कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. अंजीर एक जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए थोड़ी सी देरी भी सीधे नुकसान में बदल जाती है.

लागत बढ़ी, लेकिन दाम नहीं मिल रहे

किसानों ने इस बार खेती में काफी निवेश किया था. सिंचाई, खाद, मजदूरी और देखभाल पर भारी खर्च किया गया था, ताकि बेहतर उत्पादन मिल सके. आमतौर पर किसानों को अंजीर के लिए 8,000 से 12,000 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिल जाता है. लेकिन मौजूदा हालात में स्थानीय बाजार में इतनी ज्यादा मात्रा में अंजीर आ जाने से कीमतें तेजी से गिर गई हैं. अब किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है.

व्यापारियों और बिचौलियों पर भी असर

इस संकट का असर सिर्फ किसानों तक ही सीमित नहीं है. अंजीर के व्यापार से जुड़े बिचौलियों और व्यापारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. निर्यात बंद होने के कारण वे खरीद और बिक्री दोनों में असमर्थ हैं. इससे पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है और बाजार में असंतुलन पैदा हो गया है.

स्थानीय बाजार नहीं संभाल पा रहा अतिरिक्त माल

अचानक बड़ी मात्रा में अंजीर स्थानीय बाजार में पहुंचने से वहां मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है. बाजार इतने बड़े उत्पादन को संभाल नहीं पा रहा है, जिससे कीमतें गिरती जा रही हैं. किसानों को डर है कि अगर जल्द ही कोई नया बाजार नहीं मिला, तो उनकी फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो जाएगा.

सरकार से मदद की उम्मीद

बल्लारी के अंजीर किसानों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है. जहां एक तरफ उन्होंने बेहतर उत्पादन के लिए मेहनत और निवेश किया, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय हालात ने उनकी कमाई पर असर डाल दिया. ऐसे में इस क्षेत्र के सैकड़ों किसान अपनी आजीविका पर खतरा मंडरा देख अब सरकार से मदद की गुहार लगा रही है.

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Published: 24 Mar, 2026 | 02:26 PM
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