राज्यसभा में बोले जितिन प्रसाद: खाड़ी देशों में भारतीय खाद्य उत्पादों की मांग मजबूत, सरकार रख रही नजर

भारत से पश्चिम एशिया को भेजे जाने वाले उत्पाद सिर्फ एक या दो चीजों तक सीमित नहीं हैं. इसमें अनाज, बासमती चावल, भैंस का मांस, ताजे फल और सब्जियां, मसाले और प्रोसेस्ड फूड जैसे कई उत्पाद शामिल हैं. ये सभी उत्पाद देश के अलग-अलग राज्यों से आते हैं और बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 28 Mar, 2026 | 08:30 AM

India agricultural exports: आज के दौर में वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और इसका सीधा असर व्यापार पर भी पड़ रहा है. खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने भारत के कृषि निर्यात को लेकर चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि यह क्षेत्र भारत के लिए एक बड़ा बाजार है. ऐसे में सरकार अब इस पूरे हालात पर नजर बनाए हुए है, ताकि किसानों और निर्यातकों को किसी तरह का नुकसान न हो.

राज्यसभा में दिए गए जवाब में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि पश्चिम एशिया भारत के कृषि निर्यात का एक अहम हिस्सा है. देश के कुल कृषि निर्यात का करीब पांचवां हिस्सा यानी लगभग 20 प्रतिशत इसी क्षेत्र में जाता है.

खाड़ी देशों में भारतीय उत्पादों की मजबूत पकड़

पश्चिम एशिया के जिन देशों में भारत अपने कृषि उत्पाद भेजता है, उनमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी देश शामिल हैं. इसके अलावा ईरान, इराक और यमन भी इस सूची में आते हैं. वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इन देशों को भारत से करीब 10.68 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए गए. यह कुल कृषि निर्यात का लगभग 20.5 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र की अहमियत को दर्शाता है.

हर तरह के कृषि उत्पादों की हो रही सप्लाई

भारत से पश्चिम एशिया को भेजे जाने वाले उत्पाद सिर्फ एक या दो चीजों तक सीमित नहीं हैं. इसमें अनाज, बासमती चावल, भैंस का मांस, ताजे फल और सब्जियां, मसाले और प्रोसेस्ड फूड जैसे कई उत्पाद शामिल हैं. ये सभी उत्पाद देश के अलग-अलग राज्यों से आते हैं और बड़ी मात्रा में निर्यात किए जाते हैं. इससे लाखों किसानों की आमदनी जुड़ी हुई है.

युद्ध और तनाव से बढ़ीं चुनौतियां

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब व्यापार पर भी दिखने लगा है. सरकार के अनुसार इस स्थिति के कारण शिपिंग रूट और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हो रहे हैं.निर्यातकों ने बताया है कि माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, युद्ध जोखिम शुल्क (war-risk surcharge) लगाया जा रहा है, कंटेनरों की कमी हो रही है और बंदरगाहों पर भीड़ बढ़ रही है. इससे समय पर माल भेजना मुश्किल हो रहा है और लागत भी बढ़ रही है.

प्रोसेस्ड फूड निर्यात में भी तेजी

इन चुनौतियों के बावजूद भारत का प्रोसेस्ड फूड निर्यात लगातार बढ़ रहा है. 2020-21 से 2024-25 के बीच यूरोपियन यूनियन को प्रोसेस्ड फूड का निर्यात करीब 49.5 प्रतिशत बढ़ा है. वहीं पश्चिम एशिया के देशों को भी प्रोसेस्ड फूड का निर्यात करीब 18 प्रतिशत बढ़ा है. इससे यह साफ है कि भारतीय खाद्य उत्पादों की मांग वैश्विक स्तर पर मजबूत बनी हुई है.

दाल और तिलहन उत्पादन में सुधार

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार लगातार नई किस्मों पर काम कर रही है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 2014 से 2025 के बीच कुल 917 नई उच्च उत्पादक और जलवायु अनुकूल किस्में विकसित की गई हैं.इनमें 444 तिलहन और 473 दालों की किस्में शामिल हैं. इनमें से बड़ी संख्या अब किसानों द्वारा अपनाई जा रही है, जिससे उत्पादन में सुधार देखने को मिल रहा है.

कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश

कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान दे रही है. कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत देशभर में 1.70 लाख से ज्यादा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिन पर 84,502 करोड़ रुपये से अधिक खर्च स्वीकृत हुआ है. अब तक करीब 62,219 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं. इससे भंडारण क्षमता बढ़ी है, फसल खराब होने का नुकसान कम हुआ है और किसानों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिली है.

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Published: 28 Mar, 2026 | 08:30 AM
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