मछली पालन से कमाई बढ़ाने का आसान तरीका, सरकार ने बताए तालाब और देखभाल के जरूरी टिप्स

Pond Management: मछली पालन किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनता जा रहा है. सरकार ने तालाब बनाने से लेकर देखभाल तक के आसान तरीके बताए हैं. सही समय पर खाद, दवा और पानी का ध्यान रखकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इन सरल उपायों को अपनाकर किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

नोएडा | Published: 29 Mar, 2026 | 04:26 PM

Fish Farming: अगर आप खेती के साथ कमाई बढ़ाने का नया तरीका ढूंढ रहे हैं, तो मछली पालन आपके लिए बेहतरीन विकल्प बन सकता है. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने मछली पालकों के लिए आसान और काम की जानकारी जारी की है. इन बातों को अपनाकर किसान कम खर्च में अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

तालाब बनाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

मछली पालन की शुरुआत  सही तालाब से होती है. विभाग के अनुसार तालाब ऐसी जमीन पर होना चाहिए जो गहरी हो और जिसमें पानी लंबे समय तक जमा रह सके. मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जो पानी को रोक कर रखे, ताकि बार-बार पानी भरने की जरूरत न पड़े. तालाब ऐसी जगह बनाना चाहिए जहां धूप अच्छी मात्रा में पहुंचे, क्योंकि धूप से पानी में प्राकृतिक भोजन  (प्लवक) बनता है, जो मछलियों के लिए जरूरी होता है. इसके साथ ही पास में कोई स्थायी जल स्रोत होना चाहिए, जैसे नहर या बोरिंग, ताकि जरूरत पड़ने पर पानी आसानी से मिल सके. पानी का पीएच मान भी बहुत अहम होता है. यह 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. अगर पीएच संतुलित रहेगा, तो मछलियां स्वस्थ रहेंगी और तेजी से बढ़ेंगी.

बीज डालने के बाद ऐसे करें तालाब का रखरखाव

तालाब में मछली के बीज डालने के बाद उसका सही तरीके से रखरखाव करना बहुत जरूरी है. विभाग ने बताया है कि हर महीने तालाब में उर्वरक का प्रयोग करना चाहिए. इससे पानी में पोषक तत्व बढ़ते हैं और मछलियों को प्राकृतिक भोजन  मिलता है. इसके साथ ही हर महीने गोबर का छिड़काव भी करना चाहिए. यह सस्ता और असरदार तरीका है, जिससे तालाब में प्लवक बढ़ता है. प्लवक मछलियों के लिए सबसे जरूरी भोजन होता है. हर 15 दिन में रासायनिक खाद का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसका उपयोग संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए. इसके अलावा प्लवक बढ़ाने वाली दवाओं का प्रयोग भी महीने में एक बार करना फायदेमंद होता है. अगर किसान इन सभी उपायों को सही तरीके से अपनाते हैं, तो मछलियों की ग्रोथ तेज होती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है.

बरसात के मौसम में रखें खास सावधानी

बरसात के मौसम में मछली पालन थोड़ा चुनौती  भरा हो सकता है. बादल छाए रहने और बारिश के कारण तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है. ऐसी स्थिति में मछलियों को सांस लेने में दिक्कत होती है और वे बीमार भी पड़ सकती हैं. इस समस्या से बचने के लिए तालाब में एयरेशन (हवा मिलाने की व्यवस्था) या पानी को घुमाने की व्यवस्था करनी चाहिए. इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है. विभाग ने सलाह दी है कि ऐसे मौसम में मछलियों को बीमारी से बचाने के लिए पोटाशियम परमेगनेट का उपयोग करना चाहिए. इसकी मात्रा 400 ग्राम प्रति एकड़ प्रति मीटर पानी की गहराई के हिसाब से डालनी चाहिए. इससे पानी साफ रहता है और मछलियों में संक्रमण का खतरा कम होता है.

पीएच संतुलन बिगड़े तो तुरंत करें यह उपाय

बरसात के बाद अक्सर तालाब का पीएच मान कम हो जाता है, जिससे मछलियों पर बुरा असर पड़ता है. अगर पानी ज्यादा अम्लीय हो गया, तो मछलियां कमजोर हो सकती हैं या मर भी सकती हैं. ऐसी स्थिति में तालाब में चुने का छिड़काव करना बेहद जरूरी है. विभाग के अनुसार 20 से 25 किलो चूना प्रति एकड़ के हिसाब से पानी में घोलकर डालना चाहिए. इससे पानी का पीएच संतुलित  हो जाता है और मछलियों के लिए सही वातावरण बनता है. यह उपाय आसान भी है और सस्ता भी, इसलिए किसान इसे आसानी से अपना सकते हैं.

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