हरा चारा न मिले तो चिंता नहीं, सही आहार से गाय-भैंस देंगी ज्यादा दूध और रहेंगी हेल्दी

पशुपालकों के लिए राहत की खबर है. अगर रोज हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा, तो भी सही आहार से दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक दाना, सूखा चारा और मिनरल का संतुलन गाय-भैंस को स्वस्थ रखता है और दूध की मात्रा बनाए रखने में मदद करता है.

नोएडा | Updated On: 11 Jan, 2026 | 09:12 PM

Animal Care Tips: गांवों में पशुपालन आज भी आमदनी का बड़ा सहारा है, लेकिन बदलते मौसम, महंगे चारे और सीमित संसाधनों के कारण कई पशुपालक रोज हरा चारा नहीं खिला पाते. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. अच्छी बात यह है कि अगर थोड़ी समझदारी से आहार दिया जाए, तो बिना हरे चारे के भी गाय-भैंस से अच्छा दूध लिया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सही मात्रा में दाना, सूखा चारा और मिनरल देने से यह समस्या काफी हद तक हल हो जाती है.

हरा चारा न हो तो घबराएं नहीं

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दुधारू पशुओं  के लिए हरा और ताजा चारा सबसे बेहतर माना जाता है, लेकिन हर समय यह उपलब्ध हो, जरूरी नहीं. ऐसे में पशुपालकों को पशु की दूध देने की क्षमता के हिसाब से आहार देना चाहिए. अगर पशु को पर्याप्त दाना और सूखा चारा मिल रहा है, तो वह स्वस्थ भी रहता है और दूध उत्पादन  भी बना रहता है. ठंड के मौसम में यह और ज्यादा जरूरी हो जाता है, क्योंकि शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है.

दूध के हिसाब से तय करें दाने की मात्रा

विशेषज्ञों के अनुसार दूध उत्पादन के अनुसार दाना देना सबसे सही तरीका है. भैंस से अगर एक लीटर दूध चाहिए, तो करीब आधा किलो दाना देना चाहिए. वहीं गाय के लिए एक लीटर दूध पर लगभग 400 ग्राम दाना पर्याप्त माना जाता है. सर्दियों में पशु  के शरीर को गर्म रखने और ताकत देने के लिए रोजाना करीब एक किलो अतिरिक्त सूखा दाना देना फायदेमंद रहता है. अगर किसी दिन हरा चारा मिल जाए, तो दाने की मात्रा में करीब 30 प्रतिशत तक कमी की जा सकती है.

कैल्सियम और मिनरल से बढ़ेगी ताकत

जो पशु रोजाना 10 लीटर से ज्यादा दूध देते  हैं, उनमें कैल्सियम और मिनरल की जरूरत ज्यादा होती है. ऐसे पशुओं को दिन में एक बार लगभग 100 एमएल कैल्सियम तरल रूप में देना चाहिए. इसके साथ रोजाना करीब 30 ग्राम मिनरल मिक्सचर देना भी जरूरी है. इससे दूध बढ़ने के साथ-साथ पशु की सेहत सुधरती है, कमजोरी दूर होती है और समय पर हीट आने की समस्या  भी ठीक रहती है. गर्भ ठहरने और टिकने में भी यह काफी मददगार माना जाता है.

आहार के साथ सही देखभाल भी जरूरी

कैल्सियम और मिनरल मिक्सचर बाजार में आसानी से मिल जाते हैं. इन्हें गेहूं भूसी, मक्का, ज्वार या बाजरा जैसे आहार में मिलाकर दिया जा सकता है. सही आहार के साथ साफ-सफाई, समय पर टीकाकरण  और नियमित देखभाल भी जरूरी है. इसके अलावा नस्ल सुधार के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य में ज्यादा दूध देने वाली पशु तैयार करने में मदद करता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि संतुलित आहार और सही देखभाल अपनाकर पशुपालक बिना ज्यादा खर्च किए दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं और अपनी आमदनी मजबूत कर सकते हैं.

Published: 12 Jan, 2026 | 06:00 AM

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