सर्दी में पशुओं की लापरवाही पड़ेगी भारी, थनैला से लेकर दूध गिरने तक बढ़ सकता है नुकसान

जनवरी की कड़ाके की ठंड में पशुओं की सेहत पर खास ध्यान देना जरूरी हो जाता है. ठंड और नमी से थनैला रोग का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित होता है. सही साफ-सफाई, पुआल का बिछावन और हरे चारे की उचित व्यवस्था अपनाकर पशुपालक सर्दियों में भी नुकसान से बच सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 4 Jan, 2026 | 10:00 PM

Dairy Farming: जैसे ही जनवरी की ठंड तेज होती है, वैसे ही पशुपालकों की चिंता भी बढ़ जाती है. ठंडी हवा, गिरता तापमान और नमी का असर सीधे पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. अगर इस मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाए, तो थनैला जैसी बीमारी से लेकर दूध की भारी कमी तक की समस्या खड़ी हो सकती है. इसी को देखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने जनवरी माह में पशुपालकों के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और आमदनी पर असर न पड़े.

जनवरी में क्यों बढ़ जाता है थनैला रोग का खतरा

सर्दियों के मौसम में सबसे बड़ा खतरा थनैला रोग का रहता है. ठंड और नमी के कारण पशुओं के थन जल्दी संक्रमित  हो जाते हैं. गंदगी, ठंडा फर्श और सही सफाई न होना इस बीमारी को बढ़ावा देता है. थनैला होने पर पशु को दर्द होता है, दूध की मात्रा घट जाती है और कई बार दूध पूरी तरह खराब भी हो जाता है. विभाग के अनुसार, इस महीने थन की नियमित सफाई, दूध दुहने से पहले और बाद में थन धोना और साफ कपड़े से पोंछना बेहद जरूरी है. शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराना चाहिए.

रात में पुआल का बिछावन क्यों है जरूरी

जनवरी की ठंडी रातें पशुओं  के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक होती हैं. ठंडे फर्श पर सीधे बैठने या लेटने से पशु बीमार पड़ सकते हैं. विभाग की सलाह है कि रात के समय पशुओं को पुआल या सूखी घास का बिछावन जरूर दें. इससे ठंड का असर कम होता है और पशु आराम से बैठ-लेट पाते हैं. पुआल का बिछावन न केवल ठंड से बचाता है, बल्कि थनैला और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं से भी सुरक्षा देता है.

बरसीम और जई की फसल में सिंचाई का सही समय

जनवरी में हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. अगर पशुपालकों ने हरे चारे  के लिए बरसीम की खेती की है, तो 20 से 30 दिन के अंतराल पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करते रहना चाहिए. वहीं जई की फसल में 20 से 22 दिन के अंतराल पर पानी देना फायदेमंद माना गया है. सही समय पर सिंचाई से हरा चारा रसदार और पौष्टिक बनता है, जिससे पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन दोनों बेहतर रहते हैं.

सही देखभाल से सर्दियों में भी बनी रहेगी आमदनी

अगर जनवरी में पशुओं की सही देखभाल की जाए, तो सर्दी का मौसम  नुकसान की बजाय फायदे का सौदा बन सकता है. थनैला से बचाव, साफ-सफाई, पुआल का बिछावन और हरे चारे की सही व्यवस्था से पशु स्वस्थ रहते हैं. स्वस्थ पशु ही अच्छा दूध देते हैं और यही पशुपालकों की आमदनी का मजबूत आधार है. विभाग का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और समय पर देखभाल अपनाकर पशुपालक सर्दियों में भी दूध उत्पादन और मुनाफा बनाए रख सकते हैं.

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Published: 4 Jan, 2026 | 10:00 PM

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