गर्मी में हांफ रही हैं गाय-भैंस? समय रहते संभाल लें.. वरना घट जाएगा दूध उत्पादन

गर्मी का बढ़ता तापमान गाय-भैंसों की सेहत और दूध उत्पादन पर बुरा असर डाल रहा है. हीट स्ट्रोक, पानी की कमी और गलत देखभाल से पशु तेजी से कमजोर हो सकते हैं. पशु विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते सही खानपान, ठंडी जगह और पर्याप्त पानी की व्यवस्था करके पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 10 May, 2026 | 11:24 AM

Animal Husbandry: गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुओं के लिए भी काफी मुश्किल भरा होता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान गाय-भैंसों की सेहत पर सीधा असर डालता है. यही वजह है कि इस मौसम में कई पशु अचानक कम दूध देने लगते हैं, खाना छोड़ देते हैं और सुस्त दिखाई देने लगते हैं. कई बार पशुपालक इन संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही बाद में बड़ी समस्या बन सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार गर्मियों में सही देखभाल और समय पर जरूरी उपाय अपनाकर पशुओं को हीट स्ट्रेस और हीट स्ट्रोक से बचाया जा सकता है. अगर पशु को ठंडा वातावरण, साफ पानी और संतुलित आहार मिले तो दूध उत्पादन भी बेहतर बना रहता है.

गर्मी बढ़ते ही दिखने लगते हैं ये खतरनाक संकेत

गर्मी का असर सबसे पहले पशुओं के व्यवहार  में दिखाई देता है. अगर गाय या भैंस तेज-तेज सांस लेने लगे, मुंह से ज्यादा लार गिरने लगे या बार-बार बेचैन होकर इधर-उधर घूमे, तो समझ लेना चाहिए कि पशु गर्मी से परेशान है. कई बार पशु खाना कम कर देता है या पूरी तरह छोड़ देता है. इससे शरीर कमजोर होने लगता है और दूध उत्पादन तेजी से घटने लगता है. पशु चिकित्सक के अनुसार सामान्य स्थिति में गाय-भैंस का शरीर तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. लेकिन तेज गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान पशु सुस्त हो जाता है, सिर नीचे रखता है और उसकी आंखें लाल दिखाई देने लगती हैं. कई बार नाक और नथुने सूख जाते हैं और शरीर बहुत ज्यादा गर्म महसूस होता है.

हीट स्ट्रोक और पानी की कमी से बढ़ता है खतरा

गर्मी के मौसम में पशुओं को सबसे ज्यादा खतरा हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन  यानी शरीर में पानी की कमी से होता है. जब पशु को पर्याप्त पानी नहीं मिलता या वह लगातार गर्म वातावरण में रहता है, तो शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है. ऐसे में पशु हांफने लगता है और पेशाब की मात्रा भी कम हो जाती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, कई बार ज्यादा गर्मी के कारण पशुओं का पेट भी फूलने लगता है और पाचन खराब हो जाता है. अगर स्थिति ज्यादा बिगड़ जाए तो पशु बेहोश भी हो सकता है. इसलिए जैसे ही पशु में कमजोरी, ज्यादा पसीना, धंसी आंखें या लगातार हांफने जैसे लक्षण दिखें, तुरंत सावधान हो जाना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के दिनों में पशु को लंबे समय तक धूप में बांधकर रखना सबसे बड़ी गलती होती है. इससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है और दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है.

पशुओं को ठंडा रखने के लिए अपनाएं आसान उपाय

गर्मी से बचाने के लिए सबसे जरूरी है कि पशुओं को ठंडी  और छायादार जगह पर रखा जाए. पशुशाला में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. अगर संभव हो तो छत पर घास-फूस या चारा डालकर उसे ठंडा रखा जा सकता है. पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी देना बेहद जरूरी है. सुबह और शाम पशु को नहलाने से भी शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है. कई पशुपालक सिर पर ठंडे पानी की पट्टी भी रखते हैं, जिससे गर्मी का असर कम होता है. आहार में भी बदलाव जरूरी होता है. गर्मियों में हल्का और जल्दी पचने वाला चारा देना चाहिए. पशु आहार में नमक, खनिज लवण और विटामिन जरूर मिलाने चाहिए ताकि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी न हो. इससे पशु की ताकत बनी रहती है और दूध उत्पादन भी बेहतर रहता है.

समय पर इलाज और साफ-सफाई बेहद जरूरी

अगर पशु की हालत ज्यादा खराब दिखाई दे रही हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. देरी करने पर संक्रमण और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़  सकता है. गर्मी में पशुशाला की साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गंदगी और बदबू से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी पशु की मौत हो जाए तो उसका सही तरीके से निस्तारण करना चाहिए. मृत पशु को लंबे समय तक खुले में छोड़ने से आसपास के दूसरे पशुओं में बीमारी फैल सकती है. गर्मी के मौसम में थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है. इससे न सिर्फ दूध उत्पादन अच्छा रहता है, बल्कि पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकता है.

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