Bihar Fisheries: गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों और पशुओं के लिए ही नहीं, बल्कि मछली पालन करने वाले किसानों के लिए भी बड़ी चुनौती लेकर आता है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, तालाब के पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. इसका सीधा असर मछलियों की सेहत, उनकी बढ़वार और उत्पादन पर पड़ता है. कई बार ऑक्सीजन की कमी इतनी बढ़ जाती है कि मछलियां पानी की सतह पर आकर सांस लेने लगती हैं, जो खतरे की घंटी मानी जाती है. इसी को देखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय ने मछली पालकों के लिए जरूरी सलाह जारी की है.
विभाग ने कहा है कि बढ़ती गर्मी में तालाब की ऑक्सीजन बनाए रखना सबसे जरूरी काम है. अगर समय पर ध्यान दिया जाए तो मछलियों को नुकसान से बचाया जा सकता है और उत्पादन भी अच्छा रखा जा सकता है.
गर्मी बढ़ते ही तालाब में क्यों घटती है ऑक्सीजन
मत्स्य निदेशालय के अनुसार गर्मी के दिनों में पानी का तापमान तेजी से बढ़ता है. जब पानी ज्यादा गर्म होता है, तो उसमें घुली ऑक्सीजन की मात्रा अपने आप कम होने लगती है. यही वजह है कि दोपहर और रात के समय मछलियों को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होती है. अगर तालाब में मछलियों की संख्या ज्यादा हो, पानी कम हो या सफाई ठीक से न हो, तो ऑक्सीजन की कमी और जल्दी हो सकती है. इससे मछलियों की भूख कम हो जाती है, उनका विकास रुकता है और कई बार अचानक मौत का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए गर्मी के मौसम में तालाब के पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है.
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एरेशन मशीन से तुरंत बढ़ेगी ऑक्सीजन
विभाग ने मछली पालकों को सलाह दी है कि तालाब में एरेशन मशीन (Aerator) का इस्तेमाल करें. यह मशीन पानी को लगातार हिलाती-घुमाती है, जिससे हवा का संपर्क बढ़ता है और ऑक्सीजन तेजी से पानी में घुलती है. जहां बड़े स्तर पर मछली पालन होता है, वहां एरेशन मशीन बहुत फायदेमंद मानी जाती है. खासकर रात और सुबह के समय इसे चलाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं. इससे मछलियां सक्रिय रहती हैं, दाना अच्छी तरह खाती हैं और उनकी बढ़वार भी बेहतर होती है. विभाग का कहना है कि गर्मी में यह मशीन मछली पालन को सुरक्षित रखने का सबसे असरदार तरीका है.
मशीन नहीं है तो सुबह-शाम पानी जरूर हिलाएं
हर मछली पालक के पास एरेशन मशीन होना जरूरी नहीं है. ऐसे में विभाग ने आसान घरेलू तरीका भी बताया है. अगर मशीन उपलब्ध नहीं है, तो सुबह जल्दी और शाम को तालाब के पानी को हिलाना चाहिए. पानी को हिलाने से नीचे का पानी ऊपर आता है और हवा के संपर्क में आने से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है. छोटे तालाबों में यह तरीका काफी उपयोगी माना जाता है. कई किसान बांस, डंडे या छोटे मोटर पंप की मदद से भी पानी को हिला सकते हैं. यह आसान उपाय ऑक्सीजन की कमी को काफी हद तक कम कर सकता है.
मछलियां ऊपर सांस लें तो तुरंत समझें खतरा
मत्स्य निदेशालय ने साफ कहा है कि अगर मछलियां बार-बार पानी की सतह पर आकर मुंह खोलकर सांस ले रही हैं, तो यह ऑक्सीजन की कमी का सीधा संकेत है. ऐसी स्थिति में तुरंत एरेशन मशीन चलानी चाहिए या पानी को हिलाना शुरू कर देना चाहिए. अगर इस संकेत को नजरअंदाज किया गया, तो कुछ ही घंटों में मछलियों को भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए मछली पालकों को सुबह और देर शाम तालाब का निरीक्षण जरूर करना चाहिए. गर्मी के दिनों में यह छोटी सी सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है.
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की यह सलाह मछली पालकों के लिए बेहद काम की है. गर्मी में तालाब की ऑक्सीजन पर ध्यान देना उतना ही जरूरी है जितना सही दाना और साफ पानी. अगर किसान समय पर एरेशन मशीन चलाएं, पानी हिलाएं और मछलियों के व्यवहार पर नजर रखें, तो उत्पादन बेहतर होगा और नुकसान से बचाव भी आसान रहेगा. आसान शब्दों में कहें तो गर्मी में तालाब की ऑक्सीजन ही मछलियों की जिंदगी की सबसे बड़ी सुरक्षा है.