Beetal Goat: गांवों में अब पशुपालन सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि कम लागत में अच्छी कमाई वाला मजबूत कारोबार बन चुका है. ऐसे में अगर कोई किसान या पशुपालक ऐसी बकरी की तलाश में है, जो दूध भी अच्छा दे और बच्चों व मीट से भी कमाई कराए, तो बीटल नस्ल शानदार विकल्प मानी जाती है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के पशु चिकित्सक डॉ. वाई के सोनी के अनुसार, यह नस्ल तेजी से बढ़ती है, कम खर्च में पलती है और रोजाना करीब 2.5 से 3 किलो तक दूध देने की क्षमता रखती है. इसकी खास पहचान तोते जैसे आगे निकले मुंह और लंबे लटकते कान हैं, जो इसे बाकी नस्लों से अलग बनाते हैं.
दूध और मीट दोनों में देती है दमदार रिटर्न
डॉ. सोनी के अनुसार, बीटल नस्ल की सबसे बड़ी ताकत इसका ड्यूल परपज उपयोग है. यानी यह नस्ल दूध और मीट दोनों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. एक स्वस्थ बकरी रोजाना 2.5 से 3 किलो तक दूध दे सकती है, जिससे घर की जरूरत के साथ बाजार में बिक्री से भी अच्छी आमदनी होती है. इसके दूध की मांग कई जगह ज्यादा रहती है, क्योंकि इसे पौष्टिक माना जाता है. दूसरी ओर इसका शरीर तेजी से बढ़ता है, इसलिए मीट के लिए भी व्यापारी इसे अच्छे दाम पर खरीदते हैं.
पहचान ऐसी कि एक नजर में अलग दिखे
इस नस्ल की पहचान इसके खास शरीर से होती है. इसका मुंह तोते की चोंच जैसा थोड़ा आगे निकला हुआ दिखाई देता है. कान लंबे, चौड़े और नीचे की ओर झुके रहते हैं. शरीर मजबूत, लंबा और ऊंचाई सामान्य बकरियों से अधिक होती है. यही वजह है कि यह नस्ल देखने में आकर्षक लगती है और बाजार में जल्दी पसंद की जाती है. सही देखभाल मिलने पर एक साल के अंदर इसका वजन करीब 35 से 40 किलो तक पहुंच सकता है, जो पशुपालकों के लिए बड़ा फायदा है.
बच्चों से बढ़ेगी झुंड की संख्या और कमाई
बीटल नस्ल की एक और खासियत इसकी अच्छी प्रजनन क्षमता है. यह नस्ल साल में औसतन 3 से 4 बच्चों तक दे सकती है. यानी एक बकरी से कुछ ही समय में पूरा छोटा झुंड तैयार किया जा सकता है. यही वजह है कि छोटे पशुपालक भी इसे तेजी से अपनाते हैं, क्योंकि दूध के साथ बच्चों की बिक्री से भी कमाई बढ़ती है. झुंड बढ़ने पर फार्म का आकार बढ़ाना आसान हो जाता है और भविष्य में मुनाफा कई गुना हो सकता है.
कम खर्च में बड़ा मुनाफा
बकरी पालन की सबसे अच्छी बात इसका कम खर्च है. शुरुआत में थोड़ा खर्च चारा, शेड और टीकाकरण पर आता है, लेकिन बाद में यह नस्ल खुले में उपलब्ध घास, पत्तियां और कृषि अवशेषों पर आसानी से पल जाती है. औसतन एक बकरी पर महीने का खर्च करीब 300 रुपये तक माना जाता है. वहीं अच्छी नस्ल की एक तैयार बकरी बाजार में 15,000 रुपये या उससे ज्यादा तक बिक जाती है. रोजाना 3 किलो तक दूध, बच्चों की अच्छी संख्या और मीट की मांग इसे पशुपालकों के लिए कम जोखिम वाला और ज्यादा मुनाफे वाला विकल्प बनाती है. अगर कम खर्च में पशुपालन से मजबूत आमदनी बनानी है, तो बीटल नस्ल की बकरी एक बेहतरीन चुनाव साबित हो सकती है. सही खानपान, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण के साथ यह नस्ल लंबे समय तक शानदार रिटर्न देती है.