पशुपालन करने वाले किसानों के लिए ब्रूसेलोसिस एक गंभीर बीमारी है. यह गाय, भैंस, भेड़ और बकरी जैसे पशुओं को प्रभावित कर सकती है. खास बात यह है कि यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैल सकती है. संक्रमित पशु के गर्भपात के दौरान निकलने वाले द्रव, प्लेसेंटा और अन्य शारीरिक पदार्थों के संपर्क के अलावा कच्चे या बिना पाश्चरीकृत दूध और उससे बने उत्पादों के सेवन से भी इंसान संक्रमित हो सकते हैं.
पशुओं में इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
ब्रूसेलोसिस का सबसे बड़ा असर पशुओं की प्रजनन क्षमता पर पड़ता है. संक्रमित मादा पशु में गर्भावस्था के दौरान, खासकर गर्भ के अंतिम समय में गर्भपात हो सकता है. इसके अलावा बांझपन, मृत या कमजोर बच्चे का जन्म और जेर का समय पर बाहर न निकलना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कुछ मामलों में पशु के दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है. नर पशुओं में अंडकोष में सूजन और प्रजनन संबंधी परेशानी हो सकती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि कई संक्रमित पशुओं में शुरुआत में बीमारी के साफ संकेत नहीं दिखते. ऐसे पशु झुंड में संक्रमण फैलाने का कारण बन सकते हैं. इसलिए बार-बार गर्भपात या प्रजनन संबंधी समस्या होने पर पशु का परीक्षण पशु चिकित्सक की सलाह से कराना जरूरी है.
इंसानों तक कैसे पहुंचता है संक्रमण?
ब्रूसेलोसिस एक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह पशुओं से इंसानों में फैल सकती है. WHO के अनुसार इंसानों में संक्रमण का एक प्रमुख कारण संक्रमित पशुओं का कच्चा या बिना पाश्चरीकृत दूध और उससे बने उत्पादों का सेवन है. इसके अलावा संक्रमित पशु के खून, गर्भपात के अवशेष, प्लेसेंटा या अन्य शारीरिक द्रव के सीधे संपर्क से भी संक्रमण का खतरा रहता है. किसानों, पशु चिकित्सकों, डेयरी कर्मचारियों और पशुओं के गर्भपात के अवशेषों को संभालने वाले लोगों में जोखिम अधिक रहता है. एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ब्रूसेलोसिस का फैलना बहुत दुर्लभ माना जाता है.
इंसानों में दिख सकते हैं ये लक्षण
संक्रमित इंसान में ब्रूसेलोसिस के लक्षण कई बार सामान्य बुखार जैसे लग सकते हैं. लगातार या बार-बार बुखार, कमजोरी, थकान, ज्यादा पसीना, सिरदर्द, वजन कम होना और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं. बीमारी लंबे समय तक रहने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं. इसलिए पशुओं के लगातार संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर को अपने पशुओं से संपर्क की जानकारी जरूर देनी चाहिए.
बचाव के लिए किसान इन बातों का रखें ध्यान
ब्रूसेलोसिस से बचाव के लिए संक्रमित पशुओं की पहचान और नियंत्रण सबसे जरूरी है. नए पशु को खरीदकर तुरंत पुराने झुंड में शामिल करने के बजाय पहले उसकी स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए. पशुओं में ब्रूसेलोसिस की जांच के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से उपयुक्त परीक्षण किए जा सकते हैं. गर्भपात या प्रसव के बाद निकलने वाले प्लेसेंटा और अन्य द्रव को नंगे हाथों से नहीं छूना चाहिए. दस्ताने और उचित सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करें. दूध को अच्छी तरह उबालकर या पाश्चरीकृत करके ही पीना चाहिए. सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने भी ब्रूसेलोसिस टीकाकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है. अगर किसी पशु में बार-बार गर्भपात, बांझपन या जेर रुकने जैसी समस्या दिखाई दे, तो खुद दवा देने के बजाय तुरंत पशु चिकित्सक से जांच कराएं.