Foot and Mouth Disease: देश में पशुओं को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली मुंहपका-खुरपका (FMD) बीमारी पर लगातार चल रहे टीकाकरण अभियान का असर दिखाई देने लगा है. राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अब तक 147.16 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान से करीब 8.04 करोड़ किसानों को फायदा मिला है. इसके साथ ही मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं का नेटवर्क भी लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ रहा.
147 करोड़ से ज्यादा टीके, बीमारी के मामलों में बड़ी गिरावट
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम को साल 2019 में शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य पशुओं में संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करने के साथ पशुधन की उत्पादकता बढ़ाना है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक मुंहपका-खुरपका के 147.16 करोड़ से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं. इसका सीधा लाभ लगभग 8.04 करोड़ किसानों तक पहुंचा है. लगातार टीकाकरण और बीमारी की निगरानी के चलते FMD के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है. साल 2019 में जहां इसके 132 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 40 रह गई. ब्रुसेलोसिस के मामले भी 22 से घटकर 15 हो गए हैं.
पशु स्वस्थ तो बढ़ा दूध उत्पादन, उत्पादकता में भी सुधार
पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार का असर देश के दूध उत्पादन पर भी दिखाई दे रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का दूध उत्पादन 2014-15 में 146.31 मिलियन टन था, जो 2024-25 में बढ़कर 247.87 मिलियन टन हो गया. यानी एक दशक में दूध उत्पादन में 69.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसी अवधि में औसत पशु उत्पादकता में भी 36.63 प्रतिशत का सुधार हुआ है. सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक औसत दूध उत्पादन को 3,000 किलोग्राम प्रति पशु प्रति वर्ष तक पहुंचाना है. बेहतर स्वास्थ्य और नियमित टीकाकरण को इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
4,019 मोबाइल वेटरनरी यूनिट, घर पहुंचकर हो रहा इलाज
पशुपालकों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4,019 मोबाइल वेटरनरी यूनिट काम कर रही हैं. टोल-फ्री नंबर 1962 के जरिए पशुपालक इन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं. ये मोबाइल यूनिट पशुपालकों के दरवाजे तक पहुंचकर पशुओं की जांच और उपचार कर रही हैं. अब तक इन सेवाओं के जरिए 136 लाख किसानों के करीब 276 लाख पशुओं का इलाज किया जा चुका है. वहीं, भारत पशुधन पोर्टल पर 39 करोड़ से अधिक पशुओं का पंजीकरण हो चुका है और प्रत्येक पशु को 12 अंकों की विशिष्ट पहचान दी जा रही है.
पशु स्वास्थ्य के लिए 2,010 करोड़ का बजट
पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने 2,010 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. वर्ष 2024 से ऊन उत्पादन वाले भेड़-बकरियों और प्रवासी पशुपालकों के पशुओं को भी टीकाकरण अभियान के दायरे में शामिल किया गया है. इसके अलावा, वन हेल्थ मिशन और पेंडेमिक फंड प्रोजेक्ट के जरिए पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों यानी जूनोटिक रोगों पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है. सरकार की कोशिश है कि टीकाकरण, डिजिटल पहचान, निगरानी और मोबाइल उपचार सेवाओं को एक साथ मजबूत करके पशुधन को बीमारी से सुरक्षित रखा जाए और किसानों की आय को स्थिर बनाया जा सके.