Animal Care tips: बारिश का मौसम हर किसी को राहत देता है. खेतों में हरियाली छा जाती है, मौसम ठंडा और सुहावना हो जाता है. लेकिन यही मौसम पशुपालकों के लिए कई मुश्किलें लेकर आता है. खेत-खलिहानों में चारों तरफ हरी घास उग आती है, जिसे किसान चारे के रूप में मवेशियों को खिलाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बरसात में उगी हर घास मवेशियों के लिए सही नहीं होती? कई बार यही घास उनके लिए नुकसानदायक साबित होती है. ऐसे में पशुपालकों को सावधानी बरतनी चाहिए. आइए जानते हैं कि पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) क्या कहते हैं.
हर हरी घास नहीं होती फायदेमंद
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, बरसात के दौरान खेतों और खाली जमीनों पर तेजी से हरी घास उगने लगती है. किसान सोचते हैं कि यह प्राकृतिक चारा है और इसे मवेशियों को खिला देना चाहिए. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी घास जो निचले या तराई वाले इलाकों में उगती है, वह कई बार हानिकारक कीटों और बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाती है. खासकर जहां पानी भरा रहता है, वहां की घास में फफूंदी, कीड़े या छोटे परजीवी पनप सकते हैं. अगर ये घास जानवर खा लें तो उनके पेट में गैस, अपच, डायरिया या अन्य संक्रमण हो सकता है.
गीला या सड़ा-गला चारा न खिलाएं
बारिश के दिनों में सबसे बड़ी गलती होती है-गीला या भीगा हुआ चारा जानवरों को खिलाना. जब चारे में नमी होती है, तो उसमें जल्दी फंगस यानी फफूंदी लग जाती है. ये फंगस जानवरों के पेट के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. इससे जानवरों को फूड पॉइजनिंग, लूज मोशन या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए पशुपालकों को चाहिए कि चारे को सूखे और हवादार स्थान पर रखें और पूरी तरह सूखा चारा ही मवेशियों को दें.
इन बातों का जरूर रखें ध्यान
पशु चिकित्सक के अनुसार, बारिश के पहले पानी से भी जानवरों को बचाना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, पहले बारिश का पानी अक्सर गंदा होता है और इससे पशुओं के रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है. इसके अलावा नालों, खेतों के कोनों या कीचड़ वाली जगहों की घास न तोड़ें. ऐसी जगहों पर हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस मौजूद हो सकते हैं. मवेशियों के रहने की जगह साफ और सूखी होनी चाहिए. इसके साथ ही, उनके शरीर को गीला होने से बचाएं और समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच कराते रहें.
बरसात में ये चारा सबसे सुरक्षित
बारिश के मौसम में अगर सही प्रकार का चारा दिया जाए, तो मवेशियों की सेहत बनी रहती है. नेपियर घास, मक्का और ज्वार जैसे हरे चारे इस मौसम के लिए सुरक्षित माने जाते हैं, क्योंकि इन पर बैक्टीरिया और फंगस जल्दी नहीं पनपते. इसके अलावा ऊंची और सूखी जगहों की घास तोड़कर मवेशियों को खिलाना चाहिए. बरसात के समय टीकाकरण भी बेहद जरूरी होता है, ताकि संक्रमण या अन्य बीमारियों से उनका बचाव किया जा सके.