खरीफ रिपोर्ट: धान और मोटे अनाज की बुवाई में तेजी, इस साल कुल रकबा 2 फीसदी बढ़ा

धान, मोटे अनाज और गन्ने की अच्छी बुवाई से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन तिलहन और कुछ दलहनी फसलों की सुस्त रफ्तार चिंता पैदा कर रही है. धान, जो खरीफ की सबसे अहम फसल है, में इस बार हल्की बढ़त दर्ज की गई है. अब तक 438.51 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल यह 430.06 लाख हेक्टेयर थी.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Sep, 2025 | 07:54 AM

Kharif sowing 2025: देशभर के किसान इस साल खरीफ सीजन को लेकर उत्साहित हैं. कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 खरीफ सीजन में अब तक कुल बुवाई का क्षेत्र 2 फीसदी बढ़कर 1,110.80 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 1,095.88 लाख हेक्टेयर था. समय पर और अच्छी बारिश ने खेती को रफ्तार दी है, जिससे किसानों को राहत मिली है. तो चलिए जानते हैं इस साल कौन सी फसल रही सबसे आगे.

धान की रोपाई में बढ़त

धान, जो खरीफ की सबसे अहम फसल है, में इस बार हल्की बढ़त दर्ज की गई है. अब तक 438.51 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल यह 430.06 लाख हेक्टेयर थी. जून में मानसून की समय पर दस्तक और लगातार बारिश ने खेतों में नमी बनाए रखी, जिससे किसानों ने उत्साह के साथ धान की खेती की.

दलहन में हल्की तेजी, पर तुअर-मूंग पीछे

दलहन फसलों का रकबा भी थोड़ा बढ़ा है. इस साल अब तक 118.06 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह 117.25 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि, तुअर (अरहर) और मूंग की बुवाई अभी भी पिछली साल की तुलना में कम है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ इलाकों में बारिश में देरी और मौसम की अनिश्चितता इसका कारण हो सकती है.

तिलहन की बुवाई में गिरावट

तिलहन फसलों की स्थिति इस बार चिंता का विषय है. इस साल तिलहन का कुल क्षेत्र घटकर 188.81 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 193.93 लाख हेक्टेयर था. खासकर सोयाबीन और तिल की बुवाई कम हुई है. किसानों का कहना है कि पिछले सीजन में तिलहन के दामों में उतार-चढ़ाव और समय पर बारिश न मिलने की वजह से वे इस बार अन्य फसलों की ओर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.

मोटे अनाज की बढ़ती लोकप्रियता

मोटा अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और मक्का की बुवाई में बढ़त दर्ज की गई है. इस बार 192.91 लाख हेक्टेयर में इनकी बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल यह 180.75 लाख हेक्टेयर थी. कम पानी और बेहतर पोषण के कारण ये फसलें किसानों के लिए अधिक फायदेमंद साबित हो रही हैं.

नकदी फसलों का हाल गन्ना बढ़ा, कपास घटा

नकदी फसलों में गन्ने की बुवाई थोड़ा बढ़कर 57.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल 55.68 लाख हेक्टेयर थी. दूसरी ओर कपास का रकबा घटकर 109.64 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल यह 112.48 लाख हेक्टेयर था. विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती बारिश में कमी और कीटों का खतरा कपास किसानों को सतर्क कर रहा है.

कुल मिलाकर खरीफ सीजन की शुरुआत उत्साहजनक रही है. धान, मोटे अनाज और गन्ने की अच्छी बुवाई से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन तिलहन और कुछ दलहनी फसलों की सुस्त रफ्तार चिंता पैदा कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले हफ्तों में मानसून सामान्य बना रहा, तो बाकी फसलों की बुवाई भी तेज होगी और इस साल खाद्यान्न उत्पादन पिछले साल से बेहतर रह सकता है.

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