Duck Farming: देश में पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन और पोल्ट्री व्यवसाय की तरफ किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. अब मुर्गी पालन के साथ बत्तख पालन भी किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. खास बात यह है कि बत्तख पालन में कम लागत लगती है और मुनाफा अच्छा मिलता है. बिहार पशुपालन विभाग के अनुसार, बत्तख पालन ग्रामीण इलाकों में रोजगार और अतिरिक्त आय का बेहतर साधन बन सकता है. बत्तखों की देखभाल अपेक्षाकृत आसान होती है और ये सामान्य वातावरण में भी आसानी से पल जाती हैं. यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में किसान इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
अंडा और मांस दोनों से होती है शानदार कमाई
पशुपालन विभाग के मुताबिक बत्तख पालन से अंडा और मांस दोनों के जरिए अच्छी कमाई की जा सकती है. बाजार में बत्तख के अंडों की कीमत सामान्य अंडों की तुलना में अधिक मिलती है. इसके अलावा बत्तख के मांस की मांग भी लगातार बढ़ रही है. बिहार पशुपालन विभाग के अनुसार, अंडा उत्पादन के लिए इंडियन रनर नस्ल को बेहतर माना जाता है. वहीं मांस और अंडा दोनों के लिए खाकी कैंपबेल नस्ल काफी लोकप्रिय है. ये नस्लें तेजी से बढ़ती हैं और सालभर अच्छा उत्पादन देती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि एक बत्तख साल में लगभग 250 से 300 अंडे तक दे सकती है, जो कई सामान्य मुर्गियों की तुलना में ज्यादा माना जाता है. इसी वजह से कम समय में किसानों को बेहतर मुनाफा मिलने लगता है.
कम लागत में शुरू हो सकता है व्यवसाय
बत्तख पालन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत है. बिहार पशुपालन विभाग के अनुसार, छोटे स्तर पर भी इस व्यवसाय को आसानी से शुरू किया जा सकता है. यदि कोई किसान 1000 चूजों से शुरुआत करता है तो सालभर में करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की लागत आती है. इसमें दाना, देखभाल, दवाइयां और रहने की व्यवस्था शामिल होती है. अच्छी देखभाल और सही प्रबंधन के जरिए किसान सालाना 3 से 4 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बत्तखें तालाब, खेत और खुले वातावरण में आसानी से रह लेती हैं. इससे इनके पालन पर अतिरिक्त खर्च कम आता है. यही कारण है कि छोटे और मध्यम किसान भी इस व्यवसाय को तेजी से अपना रहे हैं.
खानपान और देखभाल का रखना होता है ध्यान
बत्तख पालन में खानपान का सही प्रबंधन बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बत्तखें लगभग हर तरह का भोजन खा सकती हैं, लेकिन उनका भोजन हल्का गीला होना चाहिए. सूखा भोजन इनके गले में फंस सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा साफ पानी और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है. नियमित टीकाकरण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने से बीमारियों का खतरा कम होता है. बिहार पशुपालन विभाग का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से बत्तख पालन करें तो यह व्यवसाय कम समय में बड़ा मुनाफा देने वाला साबित हो सकता है. बढ़ती मांग और कम लागत की वजह से आने वाले समय में बत्तख पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.