एक ही तालाब से होगी दोगुनी कमाई, मछली के साथ मोती पालन पर 60 फीसदी सब्सिडी

मत्स्य पालकों के लिए आय बढ़ाने का नया अवसर सामने आया है. सरकार की योजना के तहत मछली पालन के साथ मोती उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. किसानों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलेगा. इससे एक ही तालाब से अतिरिक्त कमाई का रास्ता खुलेगा और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Jun, 2026 | 10:14 AM

Pearl Farming: मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. अब वे एक ही तालाब से मछली के साथ-साथ मोती उत्पादन करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं. किसानों की कमाई बढ़ाने और आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मोती पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की सुविधा भी दी जाएगी. इससे मत्स्य पालन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है.

मछली पालन के साथ मिलेगा अतिरिक्त कमाई का मौका

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, मत्स्य पालकों  की आय बढ़ाने के लिए मोती पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस योजना के तहत चयनित किसानों को मोती उत्पादन के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि किसान एक ही तालाब में मछली और मोती दोनों का उत्पादन कर सकते हैं. इससे उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा और मत्स्य व्यवसाय अधिक लाभदायक बन सकेगा. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है.

60 प्रतिशत तक मिलेगा सरकारी अनुदान

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, मोती पालन यूनिट  स्थापित करने के लिए कुल लागत 2.24 लाख रुपये निर्धारित की गई है. इस पर सरकार की ओर से 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. बाकी राशि लाभार्थी किसान को स्वयं वहन करनी होगी. योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास कम से कम आधा एकड़ भूमि या उपयुक्त तालाब होना जरूरी है. विभाग का मानना है कि यह सहायता किसानों को नए व्यवसाय की शुरुआत करने में मदद करेगी और उनकी आय में बढ़ोतरी का रास्ता खोलेगी.

प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी मिलेगी

मोती पालन एक वैज्ञानिक तकनीक  पर आधारित व्यवसाय है. इसलिए योजना से जुड़े किसानों को विभाग की ओर से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मोती उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. इसके अलावा विशेषज्ञ समय-समय पर किसानों का मार्गदर्शन भी करेंगे. विभाग का कहना है कि सही तकनीक अपनाकर कम क्षेत्र में भी अच्छा उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है.

ऐसे करें आवेदन और रखें ये दस्तावेज तैयार

बिहार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, इच्छुक किसान ऑनलाइन  और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन के लिए मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा. वहीं किसान अपने जिला मत्स्य कार्यालय में जाकर भी योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर आवेदन जमा कर सकते हैं. आवेदन के लिए आधार कार्ड, आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि या तालाब से जुड़े दस्तावेज, मोती पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, आधार से लिंक बैंक खाते की पासबुक की कॉपी और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होगी.

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