गुजरात में पशुओं में फैलने वाले खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी) के प्रकोप को घटाकर मात्र 3 फीसदी तक सीमित कर दिया गया है, जबकि 2025 में लगभग 80 फीसदी ‘हर्ड इम्युनिटी’ हासिल की गई है. अधिकारियों ने इसका श्रेय बड़े पैमाने पर चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान को दिया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2030 तक देश को एफएमडी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है.
गुजरात पशुपालन विभाग के अनुसार राज्य में खुरपका मुंहपका रोग की रोकथाम के लिए मुफ्त टीकाकरण अभियान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य सुधार और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर है. राज्यभर में पशुपालन विभाग और डेयरी सहकारी समितियों के हजारों कर्मचारी गांवों, खेतों और गौशालाओं में टीकाकरण कर रहे हैं. यह अभियान केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 11 सितंबर 2019 को हुई थी.
हर छह महीने में टीकाकरण से रोग से मिल रही मुक्ति
राज्य पशुपालन विभाग के अनुसार गांधीनगर जिले के लोद्रा गांव के किसान जिगर पटेल ने बताया कि उनके 32 पशु हैं और हर छह महीने में पशुपालन विभाग की टीम आकर मुफ्त टीकाकरण करती है. जिससे दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है. लोद्रा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के सचिव महेंद्र पटेल के अनुसार गांव में 1,700 से अधिक पशुओं में से लगभग 50 फीसदी का टीकाकरण हो चुका है और अभियान जारी है.
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2025 में एफएमडी के मामले घटकर 3 फीसदी रह गए
गुजरात पशुपालन विभाग की निदेशक डॉ. फाल्गुनी ठाकर ने कहा कि 1 मार्च से नया टीकाकरण अभियान शुरू हुआ है, जो साल में दो बार चलाया जाता है. उन्होंने कहा कि लगातार घटते मामलों और वायरस के कम प्रसार से इस अभियान की सफलता स्पष्ट है. उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में राज्य में केवल छिटपुट मामले सामने आए हैं और उनकी गंभीरता भी कम रही है. टीकाकरण और बायो सिक्योरिटी उपायों के चलते 2025 में वायरस का संक्रमण केवल 3 फीसदी तक सीमित रहा.
2 करोड़ गाय-भैंस में 1.71 करोड़ को लगा टीका
गुजरात में करीब 2 करोड़ गाय-भैंस हैं, जिनमें से 1.71 करोड़ टीकाकरण के लिए पात्र हैं. वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य में 337.52 लाख पशुओं को कवर करते हुए दो चरणों में टीकाकरण किया जा रहा है. इसके अलावा राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के तहत पशुओं को 12 अंकों के यूनिक ईयर टैग देकर भारत पशुधन’ पोर्टल पर पंजीकृत किया जा रहा है. जिससे उनके स्वास्थ्य और टीकाकरण की निगरानी आसान हो गई है.