दूध, अंडा और मांस उत्पादन में बिहार की लंबी छलांग, कृषि रोड मैप से ऐसे बदली तस्वीर
बिहार पशुपालन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. दूध, अंडा और मांस उत्पादन में राज्य ने तय किए गए लक्ष्यों के करीब पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ी है, बल्कि आम लोगों के पोषण स्तर में भी साफ सुधार देखने को मिला है.
Bihar Livestock Growth: कभी खेती और मजदूरी तक सीमित माने जाने वाला बिहार अब पशुपालन के दम पर नई पहचान बना रहा है. गाय-भैंस का दूध हो, मुर्गियों के अंडे या फिर मांस उत्पादन-हर मोर्चे पर बिहार ने लंबी छलांग लगाई है. राज्य ने अपने तय किए गए लक्ष्यों के करीब-करीब सभी आंकड़े छू लिए हैं. इसका सीधा फायदा गांव के किसानों और पशुपालकों को मिल रहा है, जिनकी आमदनी में साफ तौर पर बढ़ोतरी देखी जा रही है. बिहार सरकार के चौथे कृषि रोड मैप (2023-28) के तहत पशुपालन को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है. इसी का नतीजा है कि आज बिहार दूध, अंडा और मांस उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है.
दूध उत्पादन में मजबूत पकड़
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 के लिए बिहार में दूध उत्पादन का लक्ष्य 13,960 टन तय किया गया था. इसके मुकाबले राज्य में 13,397.69 टन दूध का उत्पादन हुआ, जो लक्ष्य का लगभग 96 प्रतिशत है. दूध उत्पादन बढ़ने का असर आम लोगों पर भी पड़ा है. राज्य में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता अब 277 ग्राम से बढ़कर 285 ग्राम प्रतिदिन हो गई है. इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के पोषण स्तर में सुधार देखने को मिल रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर बात करें तो दूध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर में बिहार छठे स्थान पर है, जबकि कुल उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 5.41 प्रतिशत के साथ नौवें स्थान तक पहुंच गई है.
अंडा उत्पादन में भी बड़ी छलांग
बिहार अब अंडा उत्पादन के मामले में भी पीछे नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अंडे की प्रति व्यक्ति वार्षिक उपलब्धता 27 से बढ़कर 29 हो गई है. राज्य सरकार ने 2024-25 के लिए अंडा उत्पादन का लक्ष्य 39,880 लाख तय किया था, जिसके मुकाबले 37,838.75 लाख अंडों का उत्पादन हुआ. यानी लक्ष्य का करीब 94.88 प्रतिशत हासिल कर लिया गया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सबसे खास बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में अंडा उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर के मामले में बिहार का नाम देश में शीर्ष 10 राज्यों में शामिल हो गया है. हालांकि कृषि मंत्रालय के आंकड़ो के हिसाब से अंड़ा उत्पादन में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है.
मांस उत्पादन में भी रिकॉर्ड
मांस उत्पादन के क्षेत्र में भी बिहार ने शानदार प्रदर्शन किया है. तय लक्ष्य 428 टन के मुकाबले 420.59 टन मांस का उत्पादन हुआ, जो लगभग 98.27 प्रतिशत है. इसके चलते राज्य में प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता 3.19 किलोग्राम से बढ़कर 3.27 किलोग्राम प्रतिवर्ष हो गई है. राष्ट्रीय स्तर पर मांस उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत के साथ दसवें स्थान पर है.
कृषि रोड मैप बना गेमचेंजर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चौथा कृषि रोड मैप बिहार के लिए गेमचेंजर साबित हो रहा है. इस योजना के तहत डेयरी, पोल्ट्री और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया गया. बेहतर नस्ल, टीकाकरण, पशु आहार और प्रशिक्षण पर जोर दिया गया, जिससे उत्पादन बढ़ा और पशुपालकों को सीधा फायदा मिला. खास बात यह है कि छोटे और सीमांत किसानों ने भी पशुपालन को आमदनी का मजबूत जरिया बनाया है.
किसानों की आय और पोषण-दोनों में फायदा
पशुपालन में आई इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा किसानों की जेब को हुआ है. दूध, अंडा और मांस बेचकर अब किसान नियमित आमदनी कमा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, राज्य में पोषण स्तर भी बेहतर हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स मानती हैं कि अगर यही रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में बिहार पशुपालन के क्षेत्र में देश के टॉप राज्यों में शामिल हो सकता है. कुल मिलाकर, बिहार ने यह साबित कर दिया है कि सही नीति, सही योजना और मेहनत के दम पर गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है. पशुपालन अब सिर्फ सहायक काम नहीं, बल्कि बिहार की ताकत बन चुका है.