Animal Care: पशु को बीमारी से बचाने के लिए बड़े काम के हैं ये 4 टिप्स, पशुपालन नोट कर लें

पशुओं में संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पशुपालकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और बीमार पशुओं को अलग रखना बेहद जरूरी है. सरकार भी मुफ्त टीकाकरण और मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाओं के जरिए पशुपालकों की मदद कर रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 May, 2026 | 11:30 PM

Livestock Health: गांवों में पशु सिर्फ जानवर नहीं, घर की कमाई, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की रोजी-रोटी का सहारा होते हैं. लेकिन एक संक्रामक बीमारी पूरे झुंड को कुछ ही दिनों में कमजोर कर सकती है. यही वजह है कि बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग लगातार पशुपालकों को जागरूक कर रहा है कि बीमारी का इलाज बाद में, बचाव पहले जरूरी है. विभाग के अनुसार नियमित टीकाकरण, साफ-सफाई और समय पर डॉक्टर की सलाह से पशुओं को खुरपका-मुंहपका, लंपी, ब्रुसेलोसिस और पीपीआर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है.

नियमित टीकाकरण सबसे जरूरी

बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग  के अनुसार, संक्रामक रोगों को रोकने का सबसे आसान और असरदार तरीका समय पर टीकाकरण है. बिहार में सरकार और केंद्र की योजनाओं के तहत कई बीमारियों के लिए फ्री टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं. पशुपालकों को चाहिए कि जैसे ही गांव में कैंप लगे, अपने गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर को जरूर टीका लगवाएं. एक टीका न सिर्फ बीमारी रोकता है, बल्कि दूध उत्पादन और पशु की ताकत भी बनाए रखता है. विभाग के अनुसार FMD, PPR, CSF और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों में टीकाकरण सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है.

बीमार पशु को तुरंत अलग रखें

अगर किसी पशु को बुखार, मुंह से लार, त्वचा पर गांठ, नाक से पानी, खांसी या खाने में कमी दिखे तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग कर दें. आम बोलचाल में इसे अलग बाड़े में बांधना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है. इससे बीमारी पूरे झुंड में नहीं फैलती. साथ ही बीमार पशु के बर्तन, रस्सी और चारा भी अलग रखें. पशुशाला में मक्खी-मच्छर और गंदगी कम रखना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि कई रोग इन्हीं से तेजी से फैलते हैं.

साफ-सफाई और पानी पर खास ध्यान

संक्रामक रोग गंदगी, संक्रमित मल-मूत्र, गंदे पानी और भीड़भाड़ वाली पशुशाला से तेजी से फैलते हैं. इसलिए पशुशाला को रोज साफ करें, फर्श पर चूना या दवा का छिड़काव करें और पानी की टंकी साफ रखें. गर्मी में ताजा पानी और बरसात में सूखा बिछावन देना बेहद जरूरी है. अगर पशु स्वस्थ माहौल में रहेगा तो उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता भी मजबूत रहेगी. यही वजह है कि विभाग साफ-सफाई को टीकाकरण जितना ही जरूरी मानता है.

मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई से तुरंत मदद लें

बिहार सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत मोबाइल पशु चिकित्सा  इकाइयों के जरिए गांव-गांव पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं. अगर किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखें तो देरी न करें और तुरंत डॉक्टर को बुलाएं. कई जगह हेल्पलाइन के जरिए भी पशु चिकित्सक घर तक पहुंचते हैं. इससे समय पर जांच, दवा और टीकाकरण हो जाता है, जिससे बड़े नुकसान से बचाव होता है.

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Published: 3 May, 2026 | 11:30 PM
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