हरियाणा के कम से कम चार जिलों में मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज (LSD) के संदिग्ध मामले सामने आए हैं. इसके बाद लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज (LUVAS) ने निगरानी और सैंपलिंग बढ़ा दी है. यूनिवर्सिटी अब तक करीब 230 सैंपल ले चुकी है. इनमें सबसे ज्यादा सैंपल नारनौल, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से लिए गए हैं, जहां संदिग्ध मामले ज्यादा मिले हैं. इनमें से 12 सैंपल जांच के लिए भोपाल स्थित NIHSAD भेजे गए हैं. इनकी जांच से बीमारी की पुष्टि हो सकेगी.
हिसार, भिवानी और कुछ अन्य जिलों से भी मवेशियों में लंपी स्किन डिजीज जैसे लक्षण दिखने की शिकायतें मिली हैं. किसान इन मामलों को लेकर स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं. अधिकारियों की ओर से संदिग्ध मवेशियों की जांच और निगरानी की जा रही है. LUVAS के पशु चिकित्सा जनस्वास्थ्य और महामारी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नरेश जिंदल ने द ट्रिब्यून को बताया कि पूरे हरियाणा में मवेशियों की सैंपलिंग जारी है. अब तक चार जिलों से सैंपल लिए गए हैं. इनमें से 12 सैंपल बीमारी की पुष्टि के लिए भोपाल भेजे गए हैं.
सभी सैंपल तय 24 घंटे के अंदर भोपाल भेजे जा रहे हैं
LUVAS के अधिकारियों के मुताबिक, सभी सैंपल तय 24 घंटे के अंदर भोपाल भेजे जा रहे हैं. वहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत इनकी जांच की जाएगी. LUVAS के प्रोफेसर नरेश जिंदल ने बताया कि यूनिवर्सिटी को ऐसे मवेशियों की शिकायतें भी मिली हैं, जिनमें टीका लगने के बाद लंपी स्किन डिजीज (LSD) जैसे लक्षण दिखाई दिए. उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आ सकते हैं. टीका बीमारी से 85 से 90 फीसदी तक सुरक्षा देता है. प्रोफेसर जिंदल के मुताबिक, टीका लगने के करीब 15 दिन बाद उसका असर दिखना शुरू होता है. पशु चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि टीका लगने के बाद शुरुआती दो हफ्तों में मवेशियों को संक्रमण हो सकता है, क्योंकि इस दौरान शरीर में पूरी तरह प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई होती है.
लंपी के मामलों पर नजर, पशु डॉक्टरों को सतर्क रहने की सलाह
LUVAS ने पशु चिकित्सकों को लंपी स्किन डिजीज (LSD) के लक्षणों पर नजर रखने और तुरंत यूनिवर्सिटी या पशुपालन विभाग को जानकारी देने की सलाह दी है. प्रोफेसर नरेश जिंदल ने बताया कि हरियाणा में अब तक इस बीमारी से किसी मवेशी की मौत की सूचना नहीं मिली है. इस बीच, गौशाला संचालकों ने भी संभावित मामलों को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी है. हिसार की गौ सेवा हेल्पलाइन कमेटी के संस्थापक सीताराम सिंघल ने कहा कि लंपी का असर खासकर गायों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है. संक्रमित पशुओं को स्वस्थ मवेशियों से अलग रखना जरूरी है, वरना बीमारी गंभीर रूप ले सकती है.